मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, Vincent H Pala ने कहा कि MDA सरकार को समर्थन देने वाले पांच पार्टी विधायकों के निलंबन के पीछे वह नहीं थे। पाला ने बताया कि उन्हें इस बात का कोई सुराग नहीं था कि MLAs ने उन्हें हटाने के लिए एक सप्ताह की समय सीमा जारी की थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधायकों ने निलंबन के बाद ही उन्हें हटाने की मांग की थी।
Vincent Pala ने कहा कि विधायकों द्वारा MDA सरकार के साथ काम करने का फैसला करने के बाद, मीडिया में ऐसी खबरें आई थीं कि CLP नेता अम्पारीन लिंगदोह ने AICC को उनके खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती दी थी, जिसके बाद पार्टी आलाकमान ने उन्हें मामले पर एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

पाला ने कहा कि  " उनके पास विधायकों को निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं है, फिर हमने SEC की बैठक बुलाई जहां अधिकांश सदस्यों ने कहा कि वे एमडीए के साथ काम करने के पक्ष में नहीं थे और फिर मैंने दिल्ली को एक रिपोर्ट भेजी। एआईसीसी ने बाद में उन्हें निलंबित करने का आदेश जारी किया ”।
MPCC अध्यक्ष ने पांच निलंबित विधायकों के दावों को भी खारिज कर दिया कि " उन्होंने एकतरफा तरीके से विभिन्न समितियों और पार्टी पदों पर चुने हुए लोगों को नियुक्त करके निरंकुश तरीके से काम किया था। सभी नियुक्तियां एआईसीसी ने विभिन्न राज्य समितियों की सिफारिशों के आधार पर की हैं।"
इनमें से कुछ विधायक जैसे Ex-CLP leader, अम्परिन लिंगदोह ऐसी समितियों का हिस्सा हैं। विधायकों द्वारा उन्हें MPCC अध्यक्ष पद से हटाने की मांग के बारे में पूछे जाने पर पाला ने कहा कि विधायक अपने आरोपों पर भी टाल-मटोल कर रहे हैं। "कभी वे मुझे दोष देते हैं, कभी AICC"।