भारत-पाकिस्तान अटारी वाघा बॉर्डर, भारत चीन के बीच सिक्किम के नाथुला बॉर्डर की तरह ही मेघालय के मैत्री द्वार भी काफी महत्वपूर्ण है। यह बॉर्डर भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार का यह प्रमुख केंद्र है। भारत की तरफ से लगभग एकतरफा व्यापार किया जाता है। सैकड़ों की संख्या में ट्रक रात भर यहां पहुंचते हैं और सुबह 9:00 बजते ही मैत्री द्वार खुल जाता है। जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार की शुरुआत होती है। शाम तक यह व्यापार चलता है। क्योंकि मेघालय पहाड़ी क्षेत्र है जबकि बांग्लादेश मैदानी इसलिए बड़ी संख्या में पत्थर और अन्य सामान यहां से बांग्लादेश भेजा जाता है ,हालांकि बांग्लादेश से भारत लगभग कुछ भी आयात नहीं किया जाता। बड़ी संख्या में पर्यटक भी बॉर्डर फेंसिंग के उस पार दोनों देशों की जीरो लाइन यानी बॉर्डर पिलर को देखने के लिए लोग पहुंचते हैं।

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यह नदीं किसी शीशे की तरह साफ है, इसलिए पुल के ऊपर से ही एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग संभव है। अगर नदी में तैरता हुआ कुछ भी पाया गया तो बीएसएफ के अधिकारी वाटर विंग को अलर्ट कर देंगे। दरअसल इस नदी का बहाव बांग्लादेश की तरफ है लिहाजा कई बार फ्लोटिंग सामान की तस्करी की जाती है। यही वजह है कि ऊंचाई वाले स्थान जैसे इस पुल से पेट्रोलिंग करना बेहद जरूरी हो जाता है।

मेघालय में बड़ी संख्या में सुपारी के पेड़ हैं। जिसकी कीमत लाखों में होती है। इसके अलावा मॉनसून नालों का इस्तेमाल अवैध तस्करी और घुसपैठ के लिए भी किया जा सकता है, इसलिए उष्णकटिबंधीय वर्षा वन के दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र में बीएसएफ के सीमा प्रहरी दलदल, पानी, सांप ,बिच्छू ,जोक और जबरदस्त उमस के बीच घने जंगल और पहाड़ी नालों के बीच पेट्रोलिंग कर रही है। न्यूज़ नेशन की टीम भी सीमा प्रहरी यों के परिश्रम को दिखाने के लिए उनके साथ साथ बनी हुई है।

पहाड़ के क्षेत्र में नदिया इतनी बड़ी नहीं होती जहां हर नदी पर स्पीड बहुत चलाई जा सके, इसलिए स्थानीय ग्रामीण लोगों की मदद से बीएसएफ वाटर पेट्रोलिंग करती है। और यह सुनिश्चित करती है की सीमा चाहे जमीन की हो या पानी की भारत के हर बॉर्डर की पहरेदारी हर पहर में की जाएगी। यह पूरे एशिया की सबसे स्वच्छ निर्मल नदी है। गर्मियों के समय इसका पानी बिल्कुल शीशे की तरह साफ और क्रिस्टल की तरह क्लियर हो जाता है। ऐसा लगता है मानो 50 फुट गहरी नदी में भी नाव किसी कांच के ऊपर कर रही हो, हालांकि अब मॉनसून की वजह से इसका पानी इतना साफ नजर नहीं आता।

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फिर भी असम ,पश्चिम बंगाल समेत भारत के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में पर्यटक किस नदी को देखने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे ही एक परिवार से न्यूज़ नेशन ने भी बात की उन्हें इस नदी की सुंदरता और निर्मलता ने मोहित कर दिया ,युवा भी इस नदी को देखकर प्रकृति से प्रेम और प्रदूषण को रोकने की कसमें खाते हैं।

यहां भारत और बांग्लादेश बॉर्डर को नदी का पानी बढ़ता है। यही वजह है मछुआरों की सुरक्षा, तस्करी को रोकना ,मवेशियों की रक्षा करना और सीमा पार किसी भी घुसपैठ को असंभव बना देने के लिए बीएसएफ की वाटर बैंक 24 घंटे वाटर पेट्रोलिंग करती है। इसके लिए इस तरह की स्पीड बोल्ट का इस्तेमाल किया जाता है, हालांकि ऊपर 1932 में अंग्रेज हुकूमत के वक्त बना हैंगिंग बृज भी है। जो उस वक्त बंगाल और आसाम यानी पहाड़ और मैदान को जोड़ने का काम करता था, उसके जरिए भी इस नदी पर निगेहबान रहती है बीएसएफ के कमांडो की निगाहें।