शिलांग। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा द्वारा समझौता ज्ञापन पर चर्चा करने के लिए मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद असम के सीमावर्ती सात गांवों के पारंपरिक मुखियाओं ने कानूनी सहारा लेने की धमकी दी है। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री आने वाले पारंपरिक मुखिया को मिलने के लिए अनुमति न दी, जबकि उनकी मुलाकात पहले से किसी से तय नहीं थी। उनसे मिलने आए मुखिया माइलीम, जिरांग और नोंगस्पंग सिएमशिप (राज्य) के अंतर्गत आने वाले गांवों के थे। 

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मैखुली के ग्राम प्रधान कलदेन संगमा ने कहा, 'मुख्यमंत्री ने जमींदारों की सहमति के बिना असम को हमारी जमीन देकर हमारे साथ धोखा किया है। मेघालय सरकार ने असम के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हम उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।' उन्होंने कहा कि मैखुली के ग्रामीणों के पास जमीन के सारे दस्तावेज हैं, लेकिन फिर भी समझौते के मुताबिक बिना सलाह के गांव को असम को सौंप दिया गया। निराश कलदेन ने कहा कि हम असम के साथ अपनी जमीन का बंटवारा नहीं करेंगे। हम उन्हें असम को अपनी जमीन देने की अनुमति न देंगे। इस दौरान अन्य लोगों ने भी अपने जमीन के दस्तावेज दिखाए। 

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उल्लेखनीय है इन ग्राम प्रधानों के साथ हुए व्यवहार के लिए मेघालय प्रदेश युवा कांग्रेस ने भी अपनी चिंता व्यक्त की। ये ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार 14 सितंबर, 1876 की अधिसूचना के आधार पर समझौते को रद्द कर दे। इस बीच उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसॉन्ग ने असम के साथ हस्ताक्षरित सीमा समझौते पर फिर से विचार करने से इनकार किया और कहा कि सभी हितधारकों के साथ गहन परामर्श के बाद निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा, 'हालांकि भूमि मेघालय के लोगों की है, अंतर-राज्यीय सीमा क्षेत्रों में विवादों को हल करना सरकार का काम है। निर्णय अच्छी तरह से संतुलित था।' उन्होंने राज्य के लोगों से इस मामले में सरकार के साथ सहयोग करने की भी अपील की।