असम के साथ मेघालय सीमा विवाद क निपटारा कराने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 29 मार्च को मेघालय और असम के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात करेंगे। शाह दोनों राज्यों के बीच मतभेदों के 12 क्षेत्रों में से छह में सीमा विवाद के समाधान को अंतिम रूप देंगे। बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में होने वाली बैठक के निर्णायक हो हो सकती है।

मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने कहा कि “मुझे एक आधिकारिक संचार मिला है कि गृह मंत्री ने 29 मार्च को शाम 4:30 बजे (बैठक की) तारीख तय की है। यह पत्र एमएचए (गृह मंत्रालय) के अतिरिक्त सचिव पीयूष गोयल की ओर से सीधे तौर पर आया है। बैठक के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं ”।


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वह और उनके असम समकक्ष, हिमंत बिस्वा सरमा दोनों राज्यों द्वारा लिए गए निर्णय को शाह के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। पिछले साल अगस्त में, वे पहले चरण में छह "कम जटिल" क्षेत्रों में विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए परस्पर सहमत हुए थे।
6 क्षेत्र हैं ताराबारी, गिज़ांग, हाहिम, बोकलापारा, खानापारा-पिलंगकाटा और रातचेरा - मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स, री-भोई और पूर्वी जयंतिया हिल्स जिलों और असम के कछार, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप जिलों के अंतर्गत आते हैं।

इस साल 29 जनवरी को दोनों राज्य सरकारों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। संगमा ने कहा था कि यह मतभेदों के शेष 6 क्षेत्रों पर चर्चा के अगले चरण के सिद्धांतों को सामने लाएगा जो अधिक जटिल हैं। समझौते के अनुसार, अंतरराज्यीय सीमा से लगे 36 विवादित गांवों में से 30, जिसमें कुल भौगोलिक क्षेत्र 18.29 वर्ग किमी है, मेघालय में रहेगा जबकि 18.51 वर्ग किमी असम में जाएगा।

  • हाहिम क्षेत्र में मेघालय को 12 गांवों में से 11 गांव मिलेंगे, जबकि री-भोई जिले में बोकलापारा मेघालय में रहेगा जबकि जुमरीगांव असम को जाएगा।
  • पाथरकुची में मेघालयवासियों के बसे हुए क्षेत्र राज्य में बने रहेंगे।
  • मैखुली क्षेत्र में मावमारी बील असम में जबकि कब्रिस्तान क्षेत्र मेघालय में रहेगा।
  • खानापारा-पिलंगकाटा क्षेत्र में, पिल्लंगकाटा, बारापाथर और मैकोली के कुछ हिस्से मेघालय के साथ रहेंगे जबकि खानापारा और ड्रीमलैंड रिज़ॉर्ट के असमिया बसे हुए क्षेत्र असम में जाएंगे।
  • पूरे ब्रह्मपुत्र रीयलटर्स समेत क्षेत्र मेघालय के पास रहेंगे। पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के मालिडोर, रातचेरा और अंपायरडेट सभी मेघालय में रहेंगे जबकि दो अन्य गांव असम में जाएंगे।