पूर्वोत्तर के दो राज्य असम (Assam) और मेघालय (Meghalaya) ने आखिरकार 50 साल पुराने सीमा विवाद (Border Dispute) को खत्म कर लिया है। ये दोनों राज्य विवादि 36 वर्ग किलोमीटर की जमीन को आधी-आधी बांटेंगे। छह बाकी जटिल क्षेत्रों में विवाद को अगले चरण में निपटाया जाएगा। दोनों राज्य इस बात पर सहमत हुए हैं कि 2011 तक मेघालय की ओर से जिन 12 इलाकों पर दावा किया गया था, यह फैसला सिर्फ उन्हीं इलाकों तक सीमित रहेगा। इसके अलावा मेघालय कोई और दावा नहीं कर सकता।

बता दें कि मणिपुर (Manipur) और त्रिपुरा (Tripura) को छोड़कर असम के अन्य तीन पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा विवाद (Border Dispute) है और कई बार यहां हिंसक झड़प भी हो जाती है। जहां अरुणाचल प्रदेश के साथ विवादों को सुलझाया जाना तय है, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सीधे हस्तक्षेप के बावजूद नागालैंड और मिजोरम के साथ विवाद बने हुए हैं। बता दें कि असम और मेघालय के बीच तय हुए इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए गृहमंत्रालय के पास भेजा जाएगा, क्योंकि अंतर-राज्यीय सीमा एक केंद्रीय विषय है। इसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। 

वहीं असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने ट्वीट कर कहा कि असम-मेघालय सीमा विवाद को सुलझाने के हमारे प्रयास फल देने लगे हैं क्योंकि पहले चरण में मतभेदों के 12 में से 6 क्षेत्रों को हल करने के लिए चिन्हित कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ 3 क्षेत्रीय समितियों की सिफारिशों के आधार पर सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। मामले पर सीएम स्तर की कई दौर की बातचीत के बाद हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं। उधर, शिलॉन्ग में मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा (Conrad Sangma) ने कहा कि वह असम के अपने समकक्ष हिमंत बिस्व सरमा के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से गुरुवार को मिलेंगे और उन्हें छह इलाकों में सीमा विवाद के हल के लिए पूर्वोत्तर के दोनों राज्यों की सिफारिश सौंपेंगे।