मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा (Conrad Sangma) ने कहा कि असम और मेघालय छह स्थानों पर सीमा विवाद को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं और ऐसे छह अन्य क्षेत्रों का जल्द ही समाधान खोजा जाएगा। मेघालय को 1972 में असम से अलग राज्य के रूप में बनाया गया था और इसने असम पुनर्गठन अधिनियम 1971 को चुनौती दी थी, जिसके कारण दोनों राज्यों की 884.9 किलोमीटर लंबी सीमा के साथ 12 स्थानों पर विवाद हुआ था। संगमा ने कहा कि दोनों राज्य विवादों को सुलझाने के प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, असम और मेघालय ने छह स्थानों (Assam Meghalaya border dispute) से संबंधित चर्चा की है और उन पर सहमति बनी है। संगमा ने अपने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta biswa sharma) के साथ पिछले महीने केंद्रीय गृह मंत्री (Amit Shah) से मुलाकात की थी और उन्हें उनकी चर्चा के परिणाम से अवगत कराया था। संगमा ने कहा कि उन्होंने केंद्र सरकार को एक रिपोर्ट सौंप दी है और उन्हें उम्मीद है कि केंद्र जल्द ही दोनों राज्यों को आमंत्रित करेगा। उन्होंने कहा, जब हम आएंगे तो इन छह स्थानों पर मतभेदों को निश्चित तौर पर सुलझा लेंगे। उन्होंने कहा, हमारा प्रयास है कि हम भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ से पहले शेष छह स्थानों पर मतभेदों को सुलझा लेंगे।

सूत्रों ने कहा कि असम और मेघालय सरकार ने गांवों पर आम सहमति बनाई और नदियों और जंगलों जैसी प्राकृतिक सीमाओं की पहचान की। छह स्थानों में 36 गांव हैं, जो 36.79 वर्ग किमी के क्षेत्र को कवर करते हैं जहां एक समझौता हो गया है। सरमा और संगमा (Conrad Sangma) के बीच चरणबद्ध तरीके से जटिल सीमा विवाद को हल करने के लिए दो दौर की बातचीत के बाद पिछले साल अगस्त में दोनों राज्यों द्वारा तीन-तीन समितियों का गठन किया गया था। समितियों द्वारा दी गई संयुक्त अंतिम सिफारिशों के अनुसार पहले चरण में निपटान के लिए लिए गए 36.79 वर्ग किमी विवादित क्षेत्र में से असम को 18.51 वर्ग किमी क्षेत्र और मेघालय 18.28 वर्ग किमी का पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होगा। असम और मेघालय के बीच विवादों के 12 बिंदुओं में से अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण अंतर वाले छह क्षेत्रों को पहले चरण में लिया गया था।