पूर्वी मणिपुर में इलाके में शनिवार को खुदाई के दौरान द्वितीय विश्व युद्ध के समय के पुराने बम मिले हैं। बम मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। बम मिलने की जानकारी सुरक्षा बलों को दी गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने बम डिफ्यूज कर दिया। रक्षा अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल ए.एस. वालिया ने कहा कि स्थानीय लोगों ने म्यांमार की सीमा से लगे कामजोंग जिले में खुदाई कार्य के दौरान बम बरामद किया। सूचना मिलने पर, सुरक्षा बलों ने स्थानीय पुलिस की सहायता से बम को सुरक्षित निपटान के लिए आबादी वाले क्षेत्र से दूर स्थानांतरित कर दिया और सेना की बम निरोधक इकाई की एक टीम ने 'हिंसक तकनीक' का उपयोग करके 250 एलबीएस बम का सुरक्षित निपटान किया।

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इस तंत्र में पूर्व-गणना किए गए विस्फोटकों की सावधानीपूर्वक और तकनीकी नियुक्ति और बम को नष्ट करने के लिए नियंत्रित विस्फोट शुरू करना शामिल था। शक्तिशाली बम का निपटान करने से पहले, मणिपुर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक संयुक्त टीम ने विस्फोट स्थल से 2 किमी के दायरे में रहने वाले 250 निवासियों और उनके विभिन्न पशुओं और पालतू जानवरों को सुरक्षित निकालने का काम सुनिश्चित किया। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि विस्फोट के कारण बिना किसी अप्रिय घटना के बम को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। बता दें कि द्वितीय विश्व युद्ध में पूर्वोत्तर भारत कई भयंकर युद्धों का स्थल था क्योंकि जापानी सेनाएं मणिपुर और नागालैंड में पहुंच गईं जब उन्होंने ब्रिटिश भारत पर आक्रमण किया।

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बता दें कि दुनिया के कई देशों में विश्व युद्ध के समय के बम मिलते रहते हैं। पिछले साल इंग्लैंड के एक्सेटर शहर में रविवार को द्वितीय विश्व युद्ध के जमाने के महाविनाशक बम को डिफ्यूज करने के लिए सेना ने पूरे शहर को ही खाली करा लिया था। जब इस बम को रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ाया गया तो उसकी धमक इतनी जोरदार थी कि कई किलोमीटर दूर स्थित घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए थे। रिहायशी इलाके में 900 किलोग्राम के इस बम के मिलने के बाद आसपास के इलाके में सघन तलाशी अभियान भी चलाया जा रहा है। ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि इस इलाके में और भी जिंदा बम मिल सकते हैं, जिन्हें अगर समय पर खोजा नहीं गया तो कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।