मणिपुर विधानसभा चुनाव में इस बार लेडी सिंघम भी मैदान में उतर चुकी हैं। दरअसल बृंदा थौनाओजम  मणिपुर की पूर्व सुपरकॉप थी। हालांकि पुलिस अधिकारी के रूप में उनका करियर काफी ऊपर-नीचे रहा, लेकिन अब वे राजनीति के मैदान में उतर चुकी हैं। 

बता दें कि बृंदा थौनाओजम 2018 में उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने 27 करोड़ रुपए से अधिक के ड्रग्स की तस्करी से जुड़े एक हाई प्रोफाइल मामले का भंडाफोड़ किया था। उस दौरान मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उन्हें वीरता पुरस्कार से भी सम्मानित किया था। हालांकि कुछ विवादों के बाद उन्होंने अपना पुरस्कार लौटा दिया था। अब वे राज्य विधानसभा चुनाव में यास्कुल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडऩे के लिए पूरी तरह तैयार है। वह औपचारिक रूप से इस साल जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गईं थीं। 

बता दें कि बृंदा थौनाओजम तीन बच्चों की मां हैं और उनके पति राजकुमार चिंगलेन एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। हालांकि बृंदा थौनाओजम कुछ आरोपों के चलते 2016 में इस्तीफा दे दिया था। दरअसल उनके ससुर आरके मेघन हैं, जो कि यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट के नेता हैं, जिसे मणिपुर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में सक्रिय विद्रोही सशस्त्र समूह है। हालांकि जब बृंदा थौनाओजम ने चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला किया तो उनके ससुर ने समर्थन नहीं किया।  

वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बृंदा थौनाओजम का जद (यू) में शामिल होने का निर्णय सही नहीं है। वे एक सेनानी के रूप में जानी जाती हैं। ऐसे में उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लडऩा चाहिए था। वे वामपंथी पार्टियों में भी शामिल हो सकती थीं। बता दें कि बृंदा थौनाओजम की मणिपुर में युवाओं की एक बड़ी फैन फॉलोइंग है, लेकिन लोगों का मानना है कि यह जरूरी नहीं है कि ये वोटों में तब्दील हो। लोगों का कहना है कि बृंदा थौनाओजम की शैली राजनीति में काम नहीं करेगी।