तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Trinamool Congress President and West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee) के तेवरों से साफ है कि वह अब किसी भी कीमत पर आगे बढ़ना चाहती हैं। ऐसे में गोवा (Goa), मणिपुर (Manipur) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में तृणमूल की वजह से कांग्रेस (congress) को नुकसान हो सकता है। क्योंकि, यूपी में ममता समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में कुछ सीट पर चुनाव लड़ सकती हैं, पर इसके जरिए तृणमूल विपक्ष की दूसरी पार्टियों को एकजुट कर कांग्रेस को अलग-थलग करने का संदेश देने की कोशिश करेगी। 

पश्चिम बंगाल के चुनाव में एनसीपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने कांग्रेस के चुनाव लड़ने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस का समर्थन किया था। भाजपा के आक्रामक प्रचार को देखते हुए पार्टी ने अपने कदम पीछे खींचते हुए प्रचार को धीमा किया था, पर तृणमूल के रुख से कांग्रेस को यह उम्मीद नहीं है। पार्टी के नेता ने कहा कि तृणमूल, गोवा और मणिपुर में हमें हराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी। 

ममता की इन कोशिशों को दूसरे विपक्षी दल भी खुलकर या पर्दे के पीछे रहकर समर्थन कर रहे हैं। उनका तर्क है कि 2014 और 2019 में नतीजे देख चुके हैं। कांग्रेस भाजपा को चुनौती नहीं दे सकती, इसीलिए अब मोदी के खिलाफ उभरे किसी दूसरी विपक्षी पार्टी को यह मौका मिलना चाहिए। ऐसे में आने वाले दिनों में विपक्षी पार्टियों के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।