पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट के बाद मची राजनीतिक उथल-पुथल से मिजोरम में चिन समुदाय के लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें म्यांमार में हालात बिगड़ने के बाद वहां रहने वाले रिश्तेदारों के पलायन का डर सता रहा है। बीते दिनों म्यांमार में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई आंग सान सू ची की सरकार के खिलाफ तख्तापलट करते हुए सेना ने सत्ता पर कब्जा कर लिया। मिजोरम के अलावा मणिपुर से लगी म्यांमार की सीमा पर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है ताकि सीमा पार से संभावित घुसपैठ पर अंकुश लगाया जा सके।

म्यांमार के साथ मिजोरम की 404 किलोमीटर लंबी सीमा लगी है। सीमावर्ती इलाकों में चिन समुदाय की बड़ी आबादी रहती है। यह लोग म्यांमार में हुई कोई तीन दशक पहले हिंसा के बाद शरण के लिए सीमा पार कर मिजोरम आ गए थे। मिजोरम की राजधानी आइजोल में ही चिन समुदाय के तीन हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।

पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर और मिजोरम की सीमाएं म्यांमार से सटी हैं। हाल के वर्षों में वहां होने वाली भारी हिंसा के बाद चिन, कूकी, मिजो और जोमी समुदाय के लोगों ने बड़े पैमाने पर पलायन कर मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों के अलावा राजधानी आइजल में शरण ली थी। अब तख्तापलट के बाद आपातकाल लागू होने के बाद म्यांमार में एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हिंसा के अंदेशे के बीच पलायन की संभावना बढ़ रही है।