सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि ‘लाभ का पद' मामले में भारतीय जनता पार्टी के 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के संबंध में निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए विचारों को मणिपुर (Manipur) के राज्यपाल (governor) इस तरह दबा नहीं सकते हैं। जस्टिस एल. नागेश्वर राव, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस बी.वी. नागरत्न (Justice L. Nageswara Rao, Justice B. R. Gavai and Justice B.V. Nagaratna) की पीठ को जब बताया गया कि निर्वाचन आयोग (election commission) से 13 जनवरी, 2021 को मिली राय पर राज्यपाल ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है, पीठ ने उक्त बात कही। 

पीठ ने कहा, ‘निर्वाचन आयोग ने सलाह दे दी है। राज्यपाल आदेश पारित क्यों नहीं कर सकते हैं? सरकार को राज्यपाल से पूछना चाहिए। कुछ किया जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग इस संबंध में अपनी राय जनवरी में ही दे चुका है। राज्यपाल इस फैसले को यूं दबाकर नहीं बैठ सकते हैं।'' शीर्ष अदालत कारोंग से विधायक डी. डी. थाईसी और अन्य द्वारा 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। 

राज्य सरकार के वकील ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सालिसीटर जनरल दूसरी पीठ के समक्ष एक अन्य मामले में बहस कर रहे हैं। इस पर न्यायालय ने इसकी सुनवाई 11 नवंबर के लिए स्थगित कर दी। मणिपुर (Manipur) से भाजपा के 12 विधायकों पर 2018 में ‘लाभ के पद' मामले में संसदीय सचिव के पद पर आसीन होने की वजह से अयोग्यता की तलवार लटकी है। इस मामले में राज्यपाल ने पिछले साल अक्तूबर में निर्वाचन आयोग की राय मांगी थी।