केन्द्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 5 साल में देश में गैरकानूनी गतिविधियां (निवारक) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 5,128 और देशद्रोह के आरोप में 229 केस दर्ज हुए हैं। बुधवार को संसद में सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई।

यूएपीए के तहत दर्ज मामलों की लिस्ट में मणिपुर सबसे ऊपर है। आंकड़ों के मुताबिक, इस उत्तर पूर्वी राज्य में कुल 1,786 केस दर्ज हुए हैं, जो कि कुल दर्ज केसों का 34.82 प्रतिशत हैं। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा सांसद अब्दुल वहाब के एक प्रश्न के जवाब में 2015 से 2019 की अवधि डेटा शेयर किया। रेड्डी ने कहा कि यह डेटा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने संकलित किया है और यह 31 दिसंबर 2019 तक का है।

आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 और 2019 के बीच यूएपीए के तहत क्रमशः 897, 922, 901, 1182 और 1126 मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा राजद्रोह के आरोप में 2015 और 2019 के बीच क्रमशः 30, 35, 51, 70 और 93 केस दर्ज किए गए।

मणिपुर में 2015 में यूएपीए के तहत 522 मामले दर्ज हुए, 2016 में 327, 2017 में 330, 2018 में 289 और 2019 में 306 मामले दर्ज किए गए। 2018 को छोड़कर इस अवधि के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मणिपुर टॉप पर रहा। 2018 में असम में यूएपीए के तहत 308 मामले दर्ज किए गए थे। राजद्रोह के मामलों के मामले में, बिहार 2015 में नौ ऐसे मामलों के साथ शीर्ष पर रहा, इसके बाद 2016 में हरियाणा 12 मामलों के साथ, 2017 में असम 19 मामलों के साथ, 2018 में झारखंड 18 मामलों के साथ और 2019 में कर्नाटक 22 मामलों के साथ शीर्ष पर रहा।