इंफाल/नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने मणिपुर लोक सेवा आयोग (MPSC) को उन उम्मीदवारों के लिए एमपीएससी 2016 की मुख्य परीक्षा (MPSC Mains Exam 2016) फिर से आयोजित करने का निर्देश दिया है, जो 2016 की मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे। एससी (SC) ने कहा कि आदेश की तारीख से चार महीने के भीतर इस परीक्षा को आयोजित किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने शुक्रवार के आदेश में वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे की ओर से अधिवक्ता प्रणव सचदेवा की सहायता से याचिकाकर्ताओं के वकील की सुनवाई के बाद तीन व्यवस्थाएं कीं।

1. मणिपुर लोक सेवा आयोग मणिपुर सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगी (मुख्य) परीक्षा, 2016 की मुख्य परीक्षा आज से 4 (चार) महीने बाद नए सिरे से आयोजित करेगा।

2. केवल वही उम्मीदवार (सफल/असफल) जो सितंबर, 2016 में आयोजित मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे, प्रस्तावित परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे।

3. सितम्बर, 2016 में आयोजित मुख्य परीक्षा के परिणाम के आधार पर पहले ही नियुक्त किये गये अभ्यर्थियों की स्थिति में इस आदेश के अनुसार पुनर्आयोजित मुख्य परीक्षा में सफल होने पर उन्हें सेवा में निरन्तरता प्रदान की जायेगी तथा संबंधित पदों पर नियुक्ति होने पर परिणामी लाभ मिलेगा।

यह उल्लेख किया जा सकता है कि 18 अक्टूबर, 2019 को मणिपुर के उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच का आदेश देते हुए इस मामले पर अपना कर्तव्य निभाने में विफल रहने के लिए मणिपुर लोक सेवा आयोग को फटकार लगाई। मणिपुर छात्र निकाय जैसे डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स एलायंस मणिपुर (डीईएसएएम), अपुनबा इरीपक्की महीरोई सिनपांगलुप (एआईएमएस) और ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) ने मणिपुर सिविल सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (एमसीएससीसीई) 2016 के दोषियों को सजा देने की मांग की थी।