उत्तर पूर्वी राज्यों में मिशन ऑर्गेनिक फॉर वैल्यु चेंज डेवलपमेंट पर नॉर्थ इस्ट योजना चलायी जा रही है। इसके जरिये रासायानमुक्त खेती के जरिये किसानो की आय को बढ़ाना है और उन्हें रोगमुक्त बनाना है। इस योजना के जरिये मणिपुर में कई किसानों ने अपने खेतों में ही जैविक खाद का निर्माण किया है और अलग-अलग प्रकार के काले  धान ऊगाकर कमाई कर रहे हैं। इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए कृषि विभाग खुद से ही नोडल विभाग बन कर काम कर रहा है और इसके साथ ही सर्विस प्रोवाइडर का भी काम कर रहा है। कृषि विभाग किसानों के साथ मिलकर श्री विधी से काले धान की खेती करा रहा है।

मिशन ऑर्गेनिक फॉ्र वैल्यु चेन चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन के तहत इसे सफल बनाने का जिम्मा कृषि विभाग ने लिया है। कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि काले धान की ऑर्गेनिक खेती कराने के लिए कृषि विभाग नॉडल विभाग बना है। इसके तहत सर्विस प्रोवाइड करने के लिए ग्रीन फाउंडेशन को रखा गया है। ग्रीन फाउंडेशन का काम काले  धान की जैविक खेती करने के लिए किसानों को जागरूक करना है।

धान की खेती के लिए जमीन का चयन भी ग्रीन फाउंडेशन करती है, उसे समय समय पर विभाग द्वारा गाइडलाइन दिया जाता है।  काले धान की खेती के लिए यह निर्देश दिया जाता है कि इसे दूसरे पौधों के आसपास नहीं लगाये। जहा पर रासायनिक खाद का इस्तेमाल होता है। साथ ही इस मिशन के तहत ऊगाया गया धान किसान सालोभर उगा सके, इसके लिए भी तैयारियां की जा रही है। इसके लिए किसानों का चयन किया जाएगा फिर उनकी लिस्ट एपीडा को भेजी जाएगी, जिससे वो पंजीकृत किसान हो जाएंगे।

काला धान सदियों से मणिपुर में होता आ रहा है। यह एक विशेष प्रकार का धान है। इसे अंग्रेजी में एरोमेटिक ब्लैक राइस कहा जाता है। इस प्रकार के धान बहुत पहले से ही एशिया के ज्यादातर हिस्सों में इस्तेमाल होते आये हैं।कई किताबो और कहानियों में इस बात का जिक्र मिलता है कि महंगा होने के कारण काला धान केवल कुछ अमीर विशिष्ट लोगों को खाने के लिए ही उत्पादित किया जाता था। पर आज अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से भी इस चावल की मांग आ रही है। इस चावल का सेवन करने से कैंसर जैसे रोगों तक से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।