हम भारतीय जिंदगी में त्योहारों को बहुत खास जगह देते हैं। वैसे तो ये त्यौहार का ही सीजन है और लगातार एक के बाद एक फेस्टिवल्स आने वाले हैं, लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं मणिपुर (Manipur) के एक ऐसे त्यौहार के बारे में जिसमें माता-पिता अपनी शादीशुदा बेटियों को अपने घर आने का आमंत्रण देते हैं और फिर सम्मान पूर्वक उनका स्वागत करते हैं। मणिपुर (Manipur) में इस त्यौहार को 'निंगोल चकौबा' (Ningol Chakouba) के नाम से जाना जाता है। इस साल ये त्योहार 6 नवंबर को मनाया जाएगा।

मणिपुर (Manipur) में मनाया जाने वाला निंगोल चकौबा का त्योहार (Ningol Chakouba festival) मुख्य रूप से बेटियों के लिए समर्पित त्यौहार है। एक तरफ जहां आज भी समाज में कई हिस्से ऐसे हैं जहां बेटियों को अपनाया नहीं जाता, उन्हें बोझ समझा जाता है तो वहीं मणिपुर एक ऐसा राज्य है जहां बेटियों को बहुत सम्मान दिया जाता है। निंगोल चकौबा (Ningol Chakouba festival) त्यौहार उसी का एक प्रतीक है। 

बताया जाता है कि इस त्योहार की शुरुआत चौथी शताब्दी में की गई थी। उस समय रानी लाइसाना ने अपने घर पर अपने भाई को खाने पर न्यौता दिया था। तब से भाई को आमंत्रण देने की प्रथा शुरू हुई। शुरुआत में इस त्यौहार को पिबा चकौबा कहा जाता था। पिबा का मतलब पुत्र या भाई। इस त्योहार की शुरुआत में पुत्रों या भाइयों को बहने अपने घर पर आमंत्रित करती थीं लेकिन 19वी शताब्दी के दौरान शासन करने वाले राजा चंद्रकृति ने अपनी बहनों को अलग-अलग तरह की दिक्कतों का सामना करते देखा तो एक विकल्प सुझाया। उन्होंने अपनी सभी बहनों को महल में न्यौता दिया। इसके बाद से पिबा चकौबा का त्यौहार निंगोल चकौबा में बदल गया। तब से लेकर आज तक हर साल बहनों और बेटियों को घर पर खाने में आमंत्रित किया जाता है।

निंगोल चकौबा का त्यौहार नवंबर महीने की पूर्णिमा के दूसरे दिन मनाया जाता है। वहीं मणिपुरी कैलेंडर के हिसाब से बात की जाए तो यह हियंगायी महीने के दूसरे पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन शादीशुदा बेटियों का माता-पिता के घर पर भव्य स्वागत होता है। अपनी बेटियों के स्वागत के लिए घर पर तरह-तरह के लज़ीज़ पकवान बनाए जाते हैं। इन बनाए गए पकवानों को वहां की भाषा में चकौबा के नाम से जाना जाता है। बड़े ही प्यार से बेटियों को ये पकवान परोसे जाते हैं। पूरे परिवार के साथ दिनभर का वक्त बिताने के बाद ढेर सारी उपहारों के साथ बेटियों की विदाई की जाती है। बिटिया भी इस दिन अपने परिवार वालों के लिए उपहार लेकर आती है।