मणिपुर की राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला के आधिकारिक बंगले के बाहर ग्रेनेड हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। इस साल जनवरी में प्रदेश की राजधानी इम्फाल में राजभवन के पास ग्रेनेड से हमला किया गया था। शुरुआती जांच में पता चला कि यह हमला यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) के म्यांमार स्थित कमांडरों के इशारे पर किया गया था। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने पिछले सप्ताह NIA को जांच सौंपी थी जिसके बाद एजेंसी ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामला दर्ज किया, जिसमें विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के साथ-साथ हत्या की कोशिश करना भी शामिल है। इस साल 19 जनवरी को शाम करीब 4।30 बजे दो संदिग्ध बाइक सवारों ने राजभवन में तैनात सुरक्षाकर्मियों पर एक चीनी निर्मित ग्रेनेड फेंका था। घटना में कोई भी घायल नहीं हुआ था। मणिपुर पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनका नाम लिश्म इबोसना मिती उर्फ जोजो, कोंसम मनिथोई सिंह और हुइड्रोम सांगबा है। ये सभी प्रतिबंधित संगठन UNLF से संबंधित हैं।

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि हमले की योजना म्यांमार में बनाई गई थी, जिसके बाद इम्फाल में संगठन सक्रिय हो गया था। मामले से परिचित एनआईए अधिकारियों ने कहा कि वे गिरफ्तार किए गए तीन यूएनएलएफ सदस्यों को हिरासत में लेंगे और उनसे उन लोगों के बारे में पूछेंगे जिन्होंने उन्हें हमले के लिए निर्देश दिए थे।

यहां तक कि जब भारत सरकार उत्तर-पूर्व के अधिकांश विद्रोही समूहों के साथ शांति वार्ता कर रही है, तब भी UNLF जैसे कई कमांडर म्यांमार में छिपे हुए हैं। यूएनएलएफ के चेयरपर्सन राजकुमार मेघन को एक दशक लंबी सजा काटने के बाद नवंबर 2019 में गुवाहाटी सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्रीय आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी ने पिछले 11 वर्षों में उत्तर-पूर्वी विद्रोही समूहों से संबंधित कई मामलों की जांच की है और कई विद्रोहियों के खिलाफ दोषसिद्धि करवाए हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी राज्यों में उग्रवाद-संबंधी घटनाओं में 2014 की तुलना में पिछले साल 80 फीसदी और नागरिकों की मौतो में 99 फीसदी की गिरावट आई। वहीं, सुरक्षाबलों की मौतों में भी 75 फीसदी की कमी आई।