मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस आरोप का जोरदार खंडन किया कि उग्रवादी संगठन सत्तारूढ़ भाजपा को वोट देने के लिए लोगों को डरा रहे हैं। इस बार भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिलने का भरोसा दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा के 29 मौजूदा विधायक चुनाव लड़ रहे हैं और उनके फिर से चुने जाने की संभावना बहुत अधिक है और भाजपा के 11 अन्य उम्मीदवार आसानी से सफल हो जाएंगे।

इससे पहले नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने पहले चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपने उम्मीदवारों के लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग की थी क्योंकि पार्टी के अनुसार उग्रवादी संगठन उन्हें डरा रहे हैं। इंफाल में एनपीपी नेताओं ने कहा कि मौजूदा स्थिति मणिपुर में शांतिपूर्ण, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव होना संभव नहीं है। मणिपुर में उग्रवादी और भूमिगत संगठन हथियारों के साथ खुलेआम घूम रहे हैं। ऐसे में मतदाता डरेंगे और मतदान के लिए बाहर नहीं आएंगे। इसलिए हम आग्रह करना चाहते हैं कि सभी भूमिगत समूहों को उनके संबंधित शिविरों में ऑपरेशन के निलंबन के तहत रखा जाए और उनके कब्जे से हथियार बरामद किए जाएं। 

बता दें कि मणिपुर में 2000 से अधिक कैडरों ने सरकार के साथ संघर्ष विराम पर समझौता किया है और वे राज्य के 14 शिविरों में रह रहे हैं। बता दें कि 2017 के चुनावों में 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 21 सीटें जीती थीं और पहली बार सत्ता में आई थी।  भाजपा ने 4 एनपीपी विधायकों, 4 नगा पीपुल्स फ्रंट के सदस्यों, तृणमूल के एक विधायक के समर्थन से सरकार बनाई थी। हालांकि, इस बार बीजेपी, एनपीपी और एनपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतार रहे हैं। मणिपुर की 60 सीटों वाली विधानसभा के लिए दो चरणों में 28 फरवरी और 5 मार्च को मतदान होगा। मतों की गिनती 10 मार्च को होगी।