म्यामांर से लगे मणिपुर के सीमांत शहर मोरेह में एक विद्युत उपकेंद्र के निर्माण के लिए खुदाई के दौरान बमों के 87 शेल बरामद हुए थे। इनके बारे में माना जाता है कि ये सेकंड वर्ल्ड वॉर के समय के हैं। मजदूरों ने मोरेह के चानोउ इलाके में खुदाई के दौरान ये बम पाए थे। माना जा रहा है कि ये बम दूसरे विश्वयुद्ध के काल के हैं, जब 1944 में जापानी सेना इलाके में आई थी। बरामद किए गए विस्फोटकों को डिफ्यूज करने के बाद इन्हें भी म्यूजियम में शामिल किया गया है।

म्यूजियम को बनाने वाले फाउंडेशन ने कहा कि हमने लगभग 16 युद्धक्षेत्रों की खोज की है और कई और भी हैं जिन्हें और शोध की आवश्यकता है। हमने ऐसे हॉटस्पॉट की पहचान की है जो पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। वहीं मणिपुर सीएम एन बीरेन सिंह ने कहा कि हम भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) साइट विकसित करने जा रहे हैं। जिन जमीनों और मकानों में बम गिरे थे, उन्हें खरीदकर संरक्षित किया जाएगा। इससे राज्य में पर्यटन को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।

इम्फाल भारत के मणिपुर राज्य की राजधानी है। इस ऐतिहासिक नगर के केन्द्र में भूतपूर्व मणिपुर राज्य की गद्दी, कंगला महल, के खण्डहर उपस्थित हैं। इम्फाल नगर इम्फाल पश्चिम ज़िले और इम्फाल पूर्व ज़िले दोनों में विस्तारित है, और शहर की अधिकांश आबादी इसके पश्चिमी भाग में निवास करती है। इम्फाल भारत सरकार द्वारा अनुसूचित स्मार्ट नगरों में से एक है।

दूसरा विश्वयुद्ध 1939 से लेकर 1945 तक चला था। इसमें करोड़ों लोग मारे गए थे। इम्फाल युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था। यह युद्ध जापानी आक्रांताओं और ब्रिटिश भारत के मध्य लड़ा गया था। सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी के साथ लगभग 70,000 जापानी सैनिक मार्च से जून 1944 तक इम्फाल और कोहिमा के आस-पास के क्षेत्रों में ब्रिटिश नेतृत्व वाली मित्र सेना के साथ लड़ाई में शहीद हुए। इस दौरान आखिरी लड़ाई रेड हिल पर लड़ी गई थी।