मणिपुर और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में हिंदी थोपने के केंद्र के कदम के विरोध में बड़ी संख्या में छात्रों ने इंफाल में सड़क पर मानव श्रृंखला बनाई। प्रदर्शनकारियों ने मणिपुर सरकार सहित क्षेत्र की राज्य सरकारों से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या उन्होंने सभी आठ उत्तर-पूर्वी राज्यों में दसवीं कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने के लिए सहमति दी है।

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बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक में एक बयान में आठ पूर्वोत्तर राज्यों के दसवीं कक्षा तक के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने की वकालत की थी। केंद्रीय गृह मंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि केंद्र को आठ राज्यों की सहमति मिल गई है। नेताओं ने संदेह जताया कि क्या आठ पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारों ने वास्तव में सहमति दी थी। देसम के अध्यक्ष लीशंगथेम लाम्यांबा ने कहा कि राज्य सरकारों को केंद्र के कदम पर अपना रुख घोषित करना चाहिए।

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केंद्रीय गृह मंत्री की टिप्पणी पर कोई स्टैंड नहीं लेने के लिए राज्य सरकारों की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने कहा, राज्य सरकारों की चुप्पी ने हमें यह संदेह करने के लिए मजबूर किया कि क्या उन्होंने अपनी सहमति दे दी है। विरोध प्रदर्शन छह छात्र निकायों-एएमएसयू, एमएसएफ, डीईएसएएम, एसयूके, एआईएमएस और केएसए की संयुक्त पहल के तहत किया गया था। विरोध के दौरान छात्रों ने मांग की कि उन्हें अपनी मातृभाषा में पढ़ने की अनुमति दी जानी चाहिए।