सोशल मीडिया पर एक पत्र काफी वायरल हो रहा है। इसमें मणिपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन इन दिल्ली (MSAD) ने ब्राह्मणों को आपत्तिजनक नामों से संबोधित किया है। आरोप लगाया गया है कि मणिपुर के विद्यालयों और महाविद्यालयों (कॉलेज) में कथित तौर पर संस्कृत भाषा थोपी जाने के लिए ब्राह्मण ही जिम्मेदार हैं। सरकार द्वारा संस्कृत को विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की घोषणा के एक दिन बाद यह विवादास्पद पत्र फेसबुक पर साझा किया गया था।

शुक्रवार (20 नवंबर 2020) को इस छात्र संगठन की तरफ से जारी की गई विवादास्पद प्रेस विज्ञप्ति (रिलीज़) में दावा किया गया था कि मणिपुर की भाजपा सरकार उत्तर-पूर्वी राज्यों में छात्रों पर संस्कृत थोपने का प्रयास कर रही है। संस्कृत भाषा को गैर स्वदेशी और सरकार को मूर्ख बताते हुए संगठन ने कहा, “मणिपुर के छात्रों को संस्कृत पढ़ाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। जहाँ इस भाषा का एक भी शब्द यहाँ की मूल आबादी की मातृभाषा को विरासत में नहीं मिला। सरकार संस्कृत भाषा थोप कर अपनी मूर्खता का प्रदर्शन कर रही है। इस भाषा का आधार घृणा, छुआछूत, लिंगभेद, अधिकार ज़माना और अंधराष्ट्रवाद है। जैसा कि हम जानते हैं कि उच्च जाति का ब्राह्मण समाज भी यही है।”

अपनी विकट अज्ञानता का प्रदर्शन करते हुए MSAD ने दावा किया कि भाजपा सरकार औपनिवेशीकरण की तथाकथित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मणिपुर के मूल निवासियों को भाषाई और अकादमिक बदलाव के ज़रिए गुलाम बना कर रखना चाहती है। पत्र में कहा गया है, “एक एलियन भाषा को यहाँ के मूल निवासियों पर लागू करना औपनिवेशीकरण का प्रतीक है। 30 से अधिक ऐसी बोलियाँ हैं जिनका इस्तेमाल यहाँ के स्थानीय लोग करते हैं लेकिन उन्हें बचाने का कोई प्रयास नहीं हो रहा है।” 

इसके बाद MSAD ने ब्राह्मणों को #रामी (b*stards) कह दिया। पत्र में कहा गया है, “इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यह सरकार पूरी तरह अंधी है, लेकिन अपने औपनिवेशिक गुरु के लिए पूरी तरह आज्ञाकारी है। जो कि भारतीय समाज के उच्च जाति वाले हिन्दू ब्राह्मण, #रामी हैं। ब्राह्मणों के आगे नतमस्तक कठपुतली जैसे तंत्र के तथाकथित शिक्षा मंत्री द्वारा किया गया ऐलान जिसके मुताबिक़ ‘संस्कृत भाषा पाठ्क्रम का हिस्सा बनेगी’ निंदनीय है।”

MSAD ने भाजपा सरकार पर मणिपुर को ‘हिन्दू बाहुल्य समाज’ में तब्दील करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पत्र में लिखा हैं, “यह सरकार शांतिदोष गोसाई का एक चरण जैसा ही होगा जिसने 18वीं सदी के दौरान मणिपुर में उथल-पुथल मचा दी थी। इसे अनुमति मिली तो यह भी वैसी जहरीली गतिविधि ही साबित होगी। हम सभी समूहों से निवेदन करते हैं कि वह मणिपुर को हिन्दू समाज में तब्दील करने की रणनीति और राज्य के लोगों को अपना गुलाम बनाने के विरुद्ध खड़े हों। एकता अमर रहे।” इस प्रेस विज्ञप्ति पर MSAD के सचिव केनेडी मोइरंगथम (Kenedy Moirangthem) का हस्ताक्षर भी मौजूद है।  

गौरतलब है कि 19 नवंबर को मणिपुर के शिक्षा मंत्री एस राजेन ने सूचना दी थी कि संस्कृत को अनेक विद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्क्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया था कि एक संस्कृत विभाग भी शुरू किया जाएगा। यानी आदेश में इस तरह की कोई भी बात नहीं कही गई थी कि संस्कृत को अनिवार्य किया जाएगा या अन्य स्थानीय भाषाओं/बोलियों को समाप्त कर दिया जाएगा। इसके बावजूद MSAD ने एक ऐसे मुद्दे पर विवाद खड़ा (हिन्दुफोबिया फैलाना) कर दिया, जिसका कोई विवादित पहलू था ही नहीं।