कांग्रेस और एनपीपी के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) (NCP) ने भी मणिपुर विधानसभा चुनावों (Manipur Assembly Elections) के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इस घोषणा पत्र में एनसीपी ने भी सशस्त्र बल (विशेष) शक्ति अधिनियम 1958 (Armed Forces (Special) Powers Act ) को निरस्त करने का वादा किया। मणिपुर विधानसभा के लिए दो चरणों में होने वाले चुनाव में राकांपा भी मैदान में है, अब तक आठ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई है। इंफाल में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक समारोह में जारी किए गए 15-सूत्रीय चुनावी घोषणापत्र (NCP poll manifesto) में राकांपा ने वादा किया कि पार्टी राज्य से अफस्पा को खत्म करने के लिए काम करेगी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र वर्मा (Narender Varma) ने घोषणापत्र जारी किया, जो वर्तमान में पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष सोराम इबोयैमा सिंह (Soram Iboyaima Singh) के साथ राज्य में मौजूद हैं। 

इस अवसर पर पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए दो उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची जारी की। इन दोनों को मिलाकर राकांपा (NCP) ने अब तक आगामी चुनावों के लिए आठ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। समारोह को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र वर्मा ने आश्वासन दिया कि यदि राकांपा उम्मीदवार चुनाव जीतते हैं और चुनाव के बाद बनने वाली सरकार का हिस्सा बनते हैं तो यह 15 सूत्री को काम को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा, अगर राकांपा चुनाव के बाद समान विचारधारा वाले दलों के साथ सत्ता साझा करती है, तो हम 15 सूत्री वादों को अमल में लाने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। राकांपा नेता ने विश्वास के साथ कहा कि कोई भी पार्टी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं करेगी और त्रिशंकु विधानसभा होगी।

उन्होंने कहा, मणिपुर 2017 के चुनावों की तरह एक और त्रिशंकु विधानसभा (hung assembly) की ओर बढ़ रहा है। दूसरी ओर राज्य राकांपा अध्यक्ष एस इबोयैमा ने कहा कि राकांपा राज्य से विवादास्पद अफ्सपा (AFSPA) को निरस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने केंद्र में तत्कालीन यूपीए सरकार की बार-बार आलोचना करने के लिए भाजपा और एनडीए में उसके सहयोगियों को जमकर लताड़ा और कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार तत्कालीन यूपीए सरकार (UPA goverment) द्वारा शुरू की गई नीतियों और कार्यक्रमों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि 2014 में सत्ता में आने के बाद से भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा कोई नई नीति या कार्यक्रम शुरू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा, वे तत्कालीन यूपीए सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर सरकार चला रहे हैं।