कांग्रेस (Congress) के नेतृत्व वाले और मणिपुर प्रोग्रेसिव सेक्युलर एलायंस (Manipur Progressive Secular Alliance) ने 48 सीपीआई कार्यकर्ताओं (CPI workers resignation ) के इस्तीफे को स्थानीय मुद्दा बताया है। बता दें कि कांग्रेस के साथ गठबंधन से नाराज वांगजिंग-तेंथा निर्वाचन क्षेत्र (Wangjing-Tentha constituency) के भाकपा कार्यकर्ताओं ने शनिवार को पार्टी छोड़ दी। भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. एम नारा (Dr. M Nara) ने कहा कि इस्तीफे कुछ गलतफहमी के कारण दिए गए हैं, जिसे जल्द ही हल कर लिया जाएगा। 

उन्होंने (Dr. M Nara) पार्टी ने एक नेता को टिकट देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है। उनेहंने कहा कि वो नेता पिछले चुनावों में हार गया था और फिर से टिकट की मांग कर रहा था। ऐसे में डेढ़ महीने की बातचीत में तय हुआ कि वामपंथी दल कई सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगा। ऐसे में पार्टी की तरफ से केवल दो उम्मीदवारों (CPI candidates ) को ही टिकट दिया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव लडऩे के लिए धन और जीतने की क्षमता आदि सहित चीजों की आवश्यकता होती है। ऐसे वाम दलों ने उम्मीदवार उतारने से परहेज किया और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठन का समर्थन करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि हमारे पास संभावित उम्मीदवार नहीं है, ऐसे में पार्टी चुनाव में कम सीटों पर ही उतर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने हमें चुनाव लडऩे की अनुमति नहीं दी हो। 

कांग्रेस प्रवक्ता के देवव्रत (Congress spokesman K Debabrata) ने कहा कि भले ही 500 सीपीआई कार्यकर्ता पार्टी छोड़ दें, लेकिन इससे गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भाकपा में कुछ लोग कांग्रेस का समर्थन करना पसंद नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने पहले भाजपा के साथ गठबंधन किया होगा, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है अधिकांश लोग हमारा समर्थन करेंगे। विपक्षी गठबंधन ने शनिवार को राज्य की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा पर ध्यान देने के साथ एक साझा एजेंडे की घोषणा की थी।