केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने की वजह से राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार एक वकील को मणिपुर की राजधानी इंफाल की एक अदालत ने जमानत दे दी है। अदालत ने यह कहते हुए जमानत दी कि वकील पर लगे आरोपों में प्रथम दृष्टया सबूतों का अभाव है।

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वकील सनाओजम समाचरण सिंह के पक्ष में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, ‘सभी को उन मुद्दों पर अपनी बात रखने और राय व्यक्त करने का अधिकार है जिनसे वे जुड़ाव रखते हैं, फिर चाहे वह सरकार के पक्ष में हो या विरोध में। आरोपी के खिलाफ राजद्रोह कानून लगाने के अभियोजन पक्ष की कार्रवाई में प्रथम दृष्टया कमी नजर आती है।’

समाचरण सिंह एक वकील होने के साथ-साथ मणिपुर कांग्रेस के प्रवक्ता भी हैं। उन्हें 12 अप्रैल की मध्यरात्रि को गिरफ्तार किया गया था। उन पर एक स्थानीय टेलीविजन टॉक शो में भारतीयों को गाली देने और अमित शाह के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप था। सिंह उस टॉक शो के पैनलिस्ट में से एक थे जिसमें हिंदी को अनिवार्य करने संबंधी शाह के बयान पर बहस हो रही थी।

उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा की मणिपुर इकाई के अध्यक्ष की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान अभियोजन पक्ष ने सिंह की हिरासत की मांग की, अदालत ने इसे खारिज कर दिया और गिरफ्तारी की रात को ही उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया। मंगलवार को जारी अदालत के जमानती आदेश में कहा गया, ‘आरोपी के बयान प्रथम दृष्टया आपत्तिजनक या अपमानजनक या इस हद तक गलत नहीं थे कि उसे हिरासत में भेज दिया जाए।’

आदेश में अदालत ने इस ओर भी इशारा किया है कि अभियोजन पक्ष यह दिखाने में असफल रहा कि आरोपी व्यक्ति के फरार होने की संभावना है और आरोप द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना है। शिकायतकर्ता ने वकील पर यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने भारत के हिंदुओं जानवर बताकर जानबूझकर अपमानित किया और नीचा दिखाया, जबकि अन्य पैनलिस्ट उन्हें ऐसा करने से रोक रहे थे।

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शिकायत में लिखा था, ‘आरोपी का उक्त कृत्य दुर्भावनापूर्ण और जानबूझकर किया गया है जो कानून द्वारा स्थापित सरकार के खिलाफ जनता के मन में घृणा, अवमानना एवं उत्तेजना लाता है और मणिपुरी हिंदुओं समेत भारत के हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा रखता है।’ इसके बाद सिंह को राजद्रोह समेत आईपीसी की विभिन्न धाराओं में गिरफ्तार किया गया था।