पूर्वोत्तर भारत के सुंदर राज्यों शामिल मणिपुर हर मामले में बेमिसाल है। यहां पर सबसे बड़ी मीठे पानी की झील लोकतक झील होने के साथ ही कई सारी ऐसी चीजें हैं जो यहां आने वालों लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर मणिपुर सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से काफी अहम है। क्योंकि यहां कई संस्कृतियों के लोग रहते हैं जो काफी प्राचीन हैं। यहां आपको एक से बढ़कर एक शैली में बनी इमारते व मंदिर मिलेंगे जो आपको मंत्रमुग्ध कर देंगे। हम आपको मणिपुर के ऐसे ही तीन सुप्रद्धि मंदिरों के बारे में बता रहे हैं जहां जाना आपके लिए काफी रोमांचक होगा।

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श्री गोविंदजी मंदिर
यह भगवान श्री श्री बैकुंठ नाथ को समर्पित एक वैष्णव मंदिर है जो थौनाओजम कुंजाकिश्वर सिंह की दिवंगत आत्मा को शाश्वत शांति के लिए बनाया गया था। यह मंदिर कांगला किले के बगल में एक प्रमुख स्थान पर स्थित है। इसमें दो स्वर्ण मढ़वाए हुए गुंबद, एक पक्का दरबार और दो बड़े सभा हॉल है। इनका निर्माण 1846 में महाराजा नारा सिंह के शासनकाल के दौरान किया गया था और 1876 में महाराजा चंद्रकृति द्वारा फिर से बनाया गया था।

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सनमही मंदिर
यह सुंदर सफेद मणिपुरी मंदिर है जिसकी छत को गोथिक शैली में पुनर्निर्मित किया गया है। यह जिरीबन में प्रकृति की गोद में स्थित है। सनमही मंदिर मणिपुर की राजधानी इम्फाल से लगभग 12.5 किमी दूर है। इस मंदिर के आस-पास एक शांतिपूर्ण वन क्षेत्र है जहां से मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य दिखाई देता है। यह मंदिर एशिया के सबसे पुराने मंदिरों में से एक माना जाता है

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इस्कॉन मंदिर
मणिपुर का इस्कॉन मंदिर ईंटों और सफेद सीमेंट का उपयोग करके बनाया गया है। यह सबसे कलात्मक रूप से सजावटी मंदिरों में से एक है जिसके गुंबद के आकार की छत आंखों को काफी सुकून देती है। इस मंदिर की छत पर चित्रों के माध्यम से भगवान कृष्ण की जीवन गतिविधियों के विभिन्न चित्रण हैं।