मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि अलग-अलग भाषाएं सीखना सभी के लिए लाभदायक है लेकिन विभिन्न भाषाएं सीखने में मौलिक पहचान से समझौता नहीं किया जाएगा। सिंह ने सात भाषाओं के लिए दो माह का भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्थानीय भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच एकता स्थापित करना और एक-दूसरे की भाषाओं और संस्कृति को सीखने और समझने में सहायता प्रदान करना है। 

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उन्होंने कहा कि अगर राज्य के विभिन्न समुदायों के लोग सिर्फ अपने-अपने समुदायों के लिए ही सोचने लगेंगे तो राज्य का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की कि कई छात्रों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपना आवेदन किया है और कहा कि विभिन्न समुदायों के बीच स्वस्थ संबंध स्थापित करने के लिए भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम का विस्तार करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्कूली छात्रों के पाठ्यक्रम में राज्य के इतिहास को शामिल करने की बात की जिससे युवा पीढ़ी राज्य के इतिहास और सभ्यता से अवगत हो सकें। 

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सिंह ने सही शिक्षा, ज्ञान और अवसंरचना के बिना पश्चिमी संस्कृति का समावेश होने के कारण हमारे समाज की संरचना प्रभावित होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी माता-पिता और अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को केवल शिक्षा और ज्ञान के लिए मोबाइल दें अन्यथा न दें क्योंकि यह हमारे समाज के पतन का एक कारण बन चुका है। राज्य के शिक्षा मंत्री बसंत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण और स्थानीय भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहल के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह मणिपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे राज्य के विभिन्न समुदायों को में निकटता बढ़ेगी। स्थानीय भाषाओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 40 प्रतिभागियों के साथ दो महीने के लिए किया जाएगा, जिसमें मेइतेई, तांगखुल, पौमई, रोंगमेइ, अनल, पाइते और ठाडो भाषाएं शामिल हैं।