मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार के मद्देनजर केंद्र सरकार यहां से सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (अफ्स्पा) वापस लेने पर विचार कर रही है। अफ्स्पा सेना को कई विशेषाधिकार प्रदान करता है जिनमें बिना किसी वारंट के लोगों को गिरफ्तार करना शामिल है। 

सिंह ने विधानसभा में कहा कि मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में व्यापक सुधार नजर आ रहा है। इसके मद्देनजर केंद्र सरकार मणिपुर से अफ्स्पा वापस लेने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग ने तीन परियोजनाओं की सिफारिश की है जिन्हें एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की वित्तीय सहायता से लागू किया जाएगा। दोलईथाबी और थौबल बहुउद्देशीय परियोजनाएं पूरी हो गयी हैं जबकि सिविल सचिवालय अदालत में लंबित एक मामले के कारण लंबित है, लेकिन इसका काम भी अंतिम निर्णय के बाद शुरू हो जायेगा। 

मुख्यमंत्री ने सदन को सूचित किया कि भ्रष्टाचार निरोधक सेल उम्मीद के मुताबिक काम कर रहा है और आम जनता तथा सरकारी अधिकारियों को सरकारी नौकरी की भर्तियों से संबधित भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होने के सिद्धांतों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास इस तरह की भर्तियों में किसी भ्रष्टाचार के सबूत हैं तो हम उचित कार्रवाई कर सकते हैं। श्री ङ्क्षसह ने कहा कि सरकार की स्टार्ट अप योजना का उद्देश्य रोजगार पैदा करना और कोविड-19 महामारी के कारण देश भर के विभिन्न राज्यों से लौटे लगभग 40,000 से 45,000 लोगों की रोजगार जरूरतों को पूरा करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन’ मामले की समीक्षा करेगी और उग्रवादियों को उनके लिए निर्धारित शिविरों में रखा जायेगा। नागा उग्रवादियों के साथ बातचीत के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार एनएससीएम-आईएन और केंद्र सरकार के बीच शांतिपूर्ण समाधान के लिए आशान्वित है।