मणिपुर में भाजपा के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने साफ कर दिया है कि एनपीपी ही उनकी सरकार का एकमात्र गठबंधन सहयोगी होगा। हालांकि उन्होंने अन्य दलों के समर्थन का स्वागत किया, लेकिन कहा कि केवल एनपीएफ विधायकों को ही उनकी मंत्रिपरिषद में शामिल किया जाएगा।

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आपको बता दें कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 32 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं एनपीपी को सात सीटें मिली थी, जबकि उसके अन्य सहयोगी एनपीएफ ने पांच सीटें जीतीं। छह विधायकों वाली जद (यू) और दो विधायकों वाली कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) ने भी बीरेन सिंह सरकार को समर्थन दिया है। तीन में से दो निर्दलीय ने भी राज्यपाल को सरकार को अपना समर्थन पत्र सौंपा है। दिलचस्प बात यह है कि मंगलवार को मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद एनपीपी के सात विधायकों ने भी भाजपा नीत सरकार को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

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एनपीपी के सात विधायकों ने बुधवार को राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा था कि वे राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को एनईडीए और एनडीए के गठबंधन सहयोगी के रूप में समर्थन देना चाहेंगे। यहां तक ​​कि जद (यू) और केपीए जैसी पार्टियों ने भाजपा को अपना समर्थन दिया, एनपीएफ के केवल एक विधायक को मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया। जिस दिन बीरेन ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, उस दिन पांच विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उनमें से एक एनपीएफ विधायक- अवंगबौ न्यूमई- थे, जबकि अन्य भाजपा से थे।

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके मंत्रिपरिषद का और विस्तार किया जाएगा। हालांकि, इसमें कुछ समय लगेगा और संभवत: विधानसभा सत्र के बाद इसे पूरा किया जाएगा। राज्यपाल ने पहले ही गुरुवार को 12वीं मणिपुर विधानसभा का पहला सत्र बुलाया था। उन्होंने भाजपा मणिपुर प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी के साथ यहां महिलाओं द्वारा संचालित तीन बाजारों का दौरा किया। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने महिला विक्रेताओं को मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ भेंट किए और सरकार को सफलतापूर्वक चलाने के लिए उनका आशीर्वाद मांगा।