कोरोना वायरस के खौफ के चलते पड़ोसी देश चीन से युवक-युवती पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंच रहे हैं। पूर्वोत्तर के दो राज्य मणिपुर और मिजोरम में विदेश से गलत तरीके से प्रवेश करने के चलते दो लोगों को पकड़ा गया है। इनमें मणिपुर की एक लड़की है जो चीन से आई है वहीं मिजोरम में वियतनाम का एक विक्षिप्त लड़का सामने आया है।




मणिपुर के चुड़ाचांदपुर जिले की 23 वर्षीय युवती चीन से लॉकडाउन के दौरान अवैध तरीके से आई है। उसका कोविड-19 का टेस्ट निगेटिव आया है। पुलिस ने उसे अवैध तरीके से प्रवेश करने के चलते गिरफ्तार किया है। वहीं उसके परिवार के खिलाफ भी अवैध तरीके से उसे आने में मदद करने के चलते मामला दर्ज किया है। मालूम हो कि पूरे राज्य में एक जिले से दूसरे में जाने पर रोक लगी हुई है। कोरोना वायरस महामारी के चलते अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से भी आने पर पाबंदी है।

 

लड़की और उसके परिवारवालों के खिलाफ चुड़ाचांदपुर के सिनघाट थाने में आपदा प्रबंधन कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। बताया जाता है कि सिनघाट की निवासी इस लड़की ने 28 फरवरी को चीन से यात्रा शुरु की थी। वह म्यांमार होते हुए 6 अप्रैल को मणिपुर पहुंची। लगभग एक महीने का वक्त उसे लगा। लड़की ने मोरे के टेंगनौपल जिले से मणिपुर में प्रवेश की कोशिश की थी। लेकिन प्रवेश द्वार बंद रहने पर उसने चुड़ाचांदपुर जिले के बेहियांग से अवैध प्रवेश किया। सीमाई द्वार पर भारी सुरक्षा बंदोबस्त के चलते उसके कई प्रयास पहले विफल हो चुके थे। कहा जा रहा है कि वह चीन से पैदल चलकर एक महीने में यहां पहुंची है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि फिलहाल लड़की क्वारेंटाइन में है इसलिए ज्यादा पूछताछ नहीं की गई है।क्वारेंटाइन का पीरियड खत्म होने पर उससे पूछताछ की जाएगी।

 

उल्लेखनीय है कि मणिपुर की म्यांमार के साथ 398 किमी की अंतरराष्ट्रीय सीमा है। वहीं मानसिक रुप से विक्षिप्त एक वियतनामी युवक मिजोरम में घुस आया। फटे कपड़े पहने 25 साल का युवक मिजोरम के पूर्व लांगधर गांव में घुस आया। लॉकडाउन को लागू करा रहे टास्क फोर्स के वांलटियरों द्वारा पूछे जाने पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। सिर्फ वह मुस्कराया।वांलटियर लालजिरटिरा का कहना है कि हमें लगा वह हमारी भाषा नहीं समझ पा रहा है। हमने उसे क्वारेंटाइन में भेज दिया। स्थानीय टॉस्क फोर्स ने लड़के की फोटो सोशल मीडिया में अपलोड कर लोगों से जानकारी देने को कहा। इन लोगों ने म्यांमार में रहने वाले मिजो समुदाय के लोगों से भी मदद मांगी।
कुछ दिनों बाद म्यांमार से सूचना आई कि वह यागून के एक पुर्नवास केंद्र में रहता था। उनके साथ यह बात नहीं कर पाता था इसलिए उन्होंने उसे छोड़ दिया। तब लोगों ने मिजोरम के उन मिशनरियों से संपर्क साधा जो कंबोडिया और वियतनाम में काम कर रहे हैं। तब साफ हुआ कि लड़का वियतनामी बोलता है। तभी पता चला कि उसका नाम 'द फूक' है और वह वियतनाम के केन थो का रहने वाला है। लड़का यह बताने में सक्षम नहीं हुआ कि वह मिजोरम कैसे पहुंचा। क्वारेंटाइन की अवधि खत्म होने के बाद फिलहाल उसे सरचिप थाने के हवाले कर दिया गया है।