मुख्यमंत्री ने यह बात इम्फाल पश्चिम जिले के मुंगसंगे गांव में "नम्बुल बचाओ पर्यावरण बचाओ" अभियान में भाग लेने के दौरान कहा कि राज्य में नदियों के प्रदूषण को रोकने के लिए जनता द्वारा एक आंदोलन अत्यंत आवश्यक है। इस अभियान की शुरुआत नंबूल नदी और उसके आसपास के क्षेत्र को साफ करने के लिए मोंगसंगे कंबा अपुनबा लूप (एमकेएनएल) ने की है।
राज्य में नदियों के क्षरण और बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए एक जन आंदोलन की आवश्यकता है। बिरेन सिंह ने ट्वीट किया कि “नम्बुल बचाओ पर्यावरण बचाओ”, नम्बुल नदी के एक मेगा सफाई अभियान में भाग लेने में प्रसन्नता  मोंगसंगे कंबा अपुनबा लूप (एमकेएनएल) ”। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पहचान की थी नंबुल नदी राज्य की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है।


बता दें कि यह नदी पश्चिम इंफाल जिले में कांगचुप पहाड़ियों से निकलती है और लोकतक झील, एक रामसर स्थल में बहती है। सिंह ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की प्रगति का भी निरीक्षण किया, जो इंफाल पश्चिम में हीरंगोइथोंग में निर्माणाधीन है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मणिपुर सरकार के कायाकल्प और नम्बुल नदी के संरक्षण परियोजना के तहत बनाया जा रहा है।

बीरेन ने बताया कि नम्बुल नदी के तट के पास बस्ती से निकलने वाले प्रदूषित जल का उपचार क्षेत्र में आने वाले उपचार संयंत्रों में किया जाएगा। राज्य सरकार पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना के तहत 97.72 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर तीन साल के भीतर नंबूल नदी को मुक्त करने के लिए परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है।