मणिपुर में कुछ उम्मीदवारों पर कथित भ्रष्टाचार और अपराध के मामले सामने आए हैं, जहां 28 फरवरी और 5 मार्च को विधानसभा चुनाव होने हैं। वहीं नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने अपने एक उम्मीदवार सपाम कंगलेपाल को यह पता चलने के बाद हटा दिया कि उसके खिलाफ 24 प्राथमिकी दर्ज हैं। मामले साइबर क्राइम, हत्या के प्रयास, एक उग्रवादी संगठन की सदस्यता, आपराधिक धमकी और साजिश से संबंधित हैं।

कंगलीपाल एनपीपी के उम्मीदवारों की पहली सूची में थे और उन्हें लामलाई सीट से मैदान में उतारा गया था। वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ कोई आरोप तय नहीं किया गया है और मुझे दोषी नहीं ठहराया गया है। कुछ दिन पहले ही मणिपुर उच्च न्यायालय ने आईएएस अधिकारी डिंगांगलुंग गंगमेई को राज्य सतर्कता विभाग द्वारा 13 दिसंबर 2021 को जारी किए गए सत्यनिष्ठा प्रमाण पत्र पर रोक लगा दी थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर नुंगबा सीट से विधानसभा चुनाव लडऩे के लिए 11 जनवरी को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। अदालत ने अगले आदेश तक आईएएस अधिकारी के इस्तीफे की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने के लिए विभाग को अंतरिम आदेश जारी किया। हालांकि भाजपा ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

मणिपुर लोकायुक्त ने पहले राज्य सरकार से गंगमेई और 21 अन्य के खिलाफ एक आदिवासी परिषद में लाभार्थी योजनाओं के लिए 18 करोड़ के दुरुपयोग में कथित संलिप्तता के लिए मामला दर्ज करने के लिए कहा था। पिछले हफ्ते भी एक निर्दलीय उम्मीदवार को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। अबुजाम उमापाड़ा लुवांग, जो जिरीबाम सीट से भाजपा के टिकट के दावेदार थे, उन्हों कहा कि वह प्रतिद्वंद्वियों की साजिश का शिकार हुए हैं। बता दें कि पहले चरण में 38 निर्वाचन क्षेत्रों में 173 उम्मीदवारों में से 31 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले लंबित घोषित किए हैं।