मणिपुर में मुख्यमंत्री पद को लेकर गुटबाजी की खबरों के बीच कार्यवाहक मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और शीर्ष पद के एक अन्य दावेदार थोंगम बिस्वजीत सिंह मंगलवार को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली पहुंचे। भाजपा के संसदीय बोर्ड ने सोमवार को मणिपुर में विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।

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भाजपा के एक शीर्ष नेता ने कहा कि केंद्रीय नेताओं ने नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा के लिए बीरेन सिंह और विश्वजीत सिंह को दिल्ली बुलाया है। भाजपा के एक नेता ने कहा, बैठक के बाद, सीतारमण और रिजिजू विधायक दल के नेता के नाम को अंतिम रूप देने के लिए अन्य भाजपा विधायकों और नेताओं के साथ चर्चा करने के लिए इंफाल आ सकते हैं। इस बीच, मणिपुर भाजपा के उपाध्यक्ष चिदानंद ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है कि राज्य में सीएम पद के लिए एक से अधिक दावेदार हैं। विश्वजीत सिंह मुख्यमंत्री के बाद निवर्तमान भाजपा सरकार में दूसरे नंबर पर थे और बीरेन सिंह से अधिक समय तक पार्टी में हैं।

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बीरेन सिंह ने अपने पारंपरिक हिंगांग विधानसभा क्षेत्र से रिकॉर्ड 5वीं बार जीत हासिल की, जबकि विश्वजीत सिंह थोंगजू सीट से चौथी बार विधानसभा के लिए चुने गए। 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 32 विधायकों के साथ बहुमत है। भाजपा की पूर्ववर्ती सहयोगी नेशनल पीपुल्स पार्टी ने सात सीटें हासिल कीं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने छह सीटें जीतीं, कांग्रेस और नगा पीपुल्स फ्रंट ने पांच-पांच सीटें हासिल कीं, एक नवगठित आदिवासी आधारित पार्टी कुकी पीपुल्स अलायंस ने दो सीटों पर कब्जा जमाया और तीन निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की है। एनपीएफ, जद (यू) और एक निर्दलीय सदस्य ने भाजपा सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। मणिपुर के चुनावी और संसदीय इतिहास में पहली बार, पांच महिला सदस्य, जो अब तक सबसे अधिक हैं, चुनी गईं, जिनमें तीन भाजपा से और दो एनपीपी से शामिल हैं। बीरेन सिंह ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और राज्यपाल ने उन्हें नई सरकार के कार्यभार संभालने तक पद पर बने रहने को कहा था।