पणजी/इंफाल। चुनाव आयोग (Election commission) ने गुरुवार को कानून मंत्रालय (law ministry) की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च की सीमा बढ़ा दी है। लोकसभा चुनावों के लिए खर्च सीमा अब बड़े राज्यों के लिए 90 लाख रुपये और छोटे राज्यों के लिए 75 लाख रुपये है। पहले यह सीमा बड़े राज्यों के लिए 70 लाख रुपये और छोटे राज्यों के लिए 54 लाख रुपये थी

इसी तरह विधानसभा चुनावों के उम्मीदवारों के लिए चुनाव खर्च की सीमा बड़े राज्यों के लिए 28 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये कर दी गई है। छोटे राज्यों में उम्मीदवार अब 20 लाख रुपये के बजाय अधिकतम 28 लाख रुपये खर्च कर सकते हैं। निर्वाचन आयोग ने कहा है कि नयी खर्च सीमा आगामी सभी चुनावों में लागू होगी।

देश के जिन पांच राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें से दो राज्य छोटे हैं, जहां प्रत्याशी 28 लाख रुपये तक खर्च कर सकते हैं, ये राज्य हैं गोवा और मणिपुर। पिछले विधानसभा चुनाव में इन राज्यों के प्रत्याशियों के लिए चुनाव में सिर्फ 20 लाख रुपये खर्च करने की अनुमति थी।

आपको बता दें कि 40 सीटों वाली गोवा विधानसभा का कार्यकाल 15 मार्च को खत्म हो रहा है। कुछ ही दिनों में यहां चुनाव की तारीखों का ऐलान हो सकता है। लेकिन इस बार कांग्रेस और बीजेपी ही नहीं बल्कि ममता बनर्जी की टीएमसी और अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी अपना दबदबा आजमाने उतर रही हैं।

गोवा विधानसभा चुनाव में इस बार चौतरफा दिलचस्प मुकाबला होने की उम्मीद है। हालांकि चुनाव से पहले हुए ओपिनियन पोल में यहां फिर से बीजेपी की सरकार बनती दिख रही है। बीजेपी को 18 से 22 सीटें मिल सकती हैं। साल 2017 में बीजेपी को यहां 13 सीटों पर जीत मिली थी। पिछले चुनाव में यहां आप का खाता नहीं खुला था लेकिन इस बार पार्टी को 7-11 सीटें मिल सकती है।

पिछली बार सबसे अधिक 17 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 4-6 सीटों पर सिमट सकती है। वहीं टीएमसी जो राज्य में जबरदस्त चुनाव प्रचार कर रही है और पिछले कुछ महीने में दूसरे दलों से कई नेताओं को पार्टी में शामिल करा चुकी है, ओपिनियन पोल में उसे सिर्फ 2 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं।

60 विधानसभा सीटों वाले मणिपुर राज्य में बीजेपी ने सरकार बनाई थी। मणिपुर विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी निकलकर आई थी। राज्य में सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 31 सीटों की जरूरत होती है। वहीं, बीजेपी ने 20 सीटें जीती थीं। इनके अलावा नगा पीपल्स फ्रंट ने 4 सीटें जीती थीं। लोक जनशक्ति पार्टी ने 1 और नैशनल पीपल्स पार्टी ने 4 सीटें जीती थीं। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 1 सीट जीती थी। निर्दलीय को 1 सीट पर जीत मिली थे। ऐसे में 28 सीटें झोली में लेकर बैठी कांग्रेस को बस 3 और विधायकों के समर्थन की जरूरत थी, लेकिन कांग्रेस अपनी सरकार नहीं बना पाई थी।