उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में अगले साल की शुरूआत में ही चुनाव होने हैं जिसके कारण सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी के लिये ये विधानसभा चुनाव काफी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में उसकी सरकार है इसलिए इन राज्यों में बीजेपी के लिए फिर से सरकार बनाना एक बडी चुनौती तो है ही लेकिन साथ ही साख का सवाल भी है। 

कोरोना की मार और किसान आंदोलन के चलते एक वर्ग बीजेपी सरकार से काफी नाराज चल रहा है, ऐसे में इन हालातों से पार पाने के लिए बीजेपी ने संघ के सुझाये मार्ग का अनुसरण करने का फैसला लिया है, जिससे उसकी नैय्या पार लग सके। उत्तर प्रदेश जैसे बडे और महत्वपूर्ण राज्य होने के कारण भी इसमें बीजेपी की साख दांव पर लगी है क्योंकि पुरानी कहावत है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है।

किसान आंदोलन के चलते और अकाली दल के साथ गठबंधन टूटने के कारण पंजाब में बीजेपी को फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। ऐसे में ऊपर से कोरोना महामारी के कारण पहली और खासकर दूसरी लहर में जिस तरह से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी है उससे बीजेपी रणनीतिकारों को लगता है कि चुनावी राज्यों में सीधे सीधे चुनाव प्रचार करना सियासी तौर पर नुकसान कर सकता हैं इसलिये बीजेपी आलाकमान ने संघ की तर्ज पर 'सेवा ही संगठन' के दूसरे चरण में सेवा कार्यों के माध्यम से ही बीजेपी कैडर और नेताओं को जनता के बीच में जाने के निर्देश दिये हैं। जिससे जनता के बीच में सहभागिता निरंतर बनी रहे।

बीजेपी की इस रणनीति के तहत पार्टी कैडर द्वारा वैक्सीनेशन पर पूरे देश में जोर दिया जायेगा क्योंकि तीसरी लहर की संभावना लगातार जताई जा रही है, इसलिये सभी नागरिकों के वैक्सीन लगे और तीसरी लहर का खतरा कम हो सके इसलिए इस तरह का अभियान सरकार के साथ साथ बीजेपी संगठन द्वारा भी चलाया जायेगा। इस अभियान के तहत खास तौर पर बुजुर्गों और बीमार लोगों को टीकाकरण केन्द्र तक लाने के लिए कार्यकर्ताओं की टीमें अलग से बनाने के निर्देश दिये गये हैं।