कई दुनिया में ऐसे पक्षी है जो कई हजारों किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं। और एक देश से दूसरे देश में प्रजनन करने के लिए आते हैं। भारत में कई ही कई तरह की ऋतुएं हैं जहां कई देशों से पक्षी आते हैं और प्रजनन करते हैं इसी तरह से साइबेरियन पक्षी भी सर्दियों के वक्त भारत आते हैं। हाल ही में पूर्वोत्तर के वन अधिकारी ने कहा कि मणिपुर के तमेंगलोंग जिले में घूमने वाले अमूर फाल्कन (फाल्कन अमूरेंसिस) अपने आगे के लिए रवाना हो गए हैं।


तामेंगलोंग के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) खारीबम हिटलर सिंह ने कहा कि दो अमूर फाल्कन्स- 'च्युलॉन' और 'ईरग' जो पिछले साल मणिपुर में रेडियो-टैग किए गए थे, भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से प्रवासी पक्षियों के अध्ययन के हिस्से के रूप में अभी भी सक्रिय और सुरक्षित हैं। खारीबम हिटलर सिंह ने कहा कि सोमालिया में हैं। केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस बारे में वन विभाग से बात की है।

 


प्रकाश जावड़ेकर ने ट्वीट कर बताया कि मणिपुर और आस-पास के क्षेत्रों में करीब 20 दिन बिताने के बाद, दो उपग्रह-टैग वाले अमूर फाल्कन्स-च्युलोन और ईगल 11 नवंबर को अपने दूसरे वर्ष के प्रवास से बाहर हो गए है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब वे पांच-साढ़े पांच दिन की नॉन-स्टॉप फ्लाइट 5,700 किमी और 5,400 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सोमालिया पहुंच गए हैं। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के अधिकारियों ने कहा कि तिमलोंग्लोंग जिले के एक गांव का नाम मणिपुर से ‘च्युलोन’ रखा गया है।