महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस गठबंधन वाली सरकार अब संकट में आ गई है, क्योंकि सामना के लेख से भड़की कांग्रेस ने करारा जवाब दिया है। दरअसल शिवसेना के मुखपत्र सामना में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन निशाना साधा गया था। इसके बाद कांग्रेस ने पलटवार किया है और कहा है कि शिवसेना को हिदायत देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने कहा कि जो पार्टी यूपीए का हिस्सा नहीं है वो यूपीए के नेतृत्व के बारे में कांग्रेस को सलाह न दे। सोनिया जी का नेतृत्व सक्षम है।

कांग्रेस की ओर से ये बयान सामना में शनिवार को छपे लेख के बाद आया है, क्योंकि सामना में यूपीए को एनजीओ जैसा बताते हुए कहा गया कि किसान आंदोलन पर कांग्रेस और यूपीए, मोदी सरकार पर दबाव बनाने में नाकाम रहे। इसके साथ ही शरद पवार को यूपीए अध्यक्ष बनाने का इशारा किया गया। इस लेख के बाद कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम अशोक चव्हाण ने शिवसेना को हिदायत दी कि जो पार्टी यूपीए का हिस्सा नहीं है उसे यूपीए के नेतृत्व के बारे में कांग्रेस को सलाह नहीं देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार ने खुद स्पष्ट किया है कि वे यूपीए की कमान नहीं संभालेंगे।

इस मसले पर महाराष्ट्र कांग्रेस नेता नसीम खान ने भी शिवसेना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के आधार पर महाराष्ट्र में शिवसेना को समर्थन दिया है। शिवसेना यूपीए का हिस्सा नहीं है। इसलिए यूपीए के बारे में शिवसेना को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार नहीं है और शिवसेना को यह ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी हमेशा मौजूदा कृषि कानूनों के खिलाफ रही है। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस पार्टी मजबूती के साथ किसानों के साथ खड़ी है।

गौरतलब है कि सामना ने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए लिखा था कि वे काम तो पर्याप्त कर रहे हैं, लेकिन उनके नेतृत्व में अभी कुछ कमी है। कांग्रेस को एक फुलटाइम अध्यक्ष की जरूरत है। इसके साथ ही यूपीए में गड़बड़ है और विपक्ष को एकजुट करने के लिए नेतृत्व की जरूरत है। यूपीए में केवल शरद पवार ही नजर आते हैं। उनके अनुभव का लाभ पीएम नरेंद्र मोदी तक लेते हैं।