आज राज्य सभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक को मंजूरी मिल गई और इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में हर वो कानून लागू हो गया, जो पूरे देश पर लागू होता है। इस संसोधन विधेयक के तहत अब जम्मू कश्मीर प्रशासनिक सेवा का अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर में विलय कर दिया गया। इसके साथ ही गृह राज्य मंत्री ने ये भी कहा कि अब देश के 170 ऐसे कानून भी जम्मू कश्मीर में लागू हो गए, जो अबतक लागू नहीं होते थे।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के कैडर से संबंधित है। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, मौजूदा जम्मू कश्मीर कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा के अधिकारी अब अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर का हिस्सा होंगे। केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए भविष्य के सभी आवंटन अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर से होंगे। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन(संसोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस कैडर को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर में विलय करने की जरूरत है ताकि इस कैडर के अधिकारियों को जम्मू कश्मीर में तैनात किया जा सके। इससे वहां कुछ हद तक अधिकारियों की कमी दूर हो सकेगी।

गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने जम्मू कश्मीर में हुए विकास का ब्यौरा देते हुए कहा कि हाल में हुए ब्लाक विकास परिषद के चुनावों में केंद्र शासित प्रदेश के 98 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि पंचायतों के जरिये मनरेगा कार्यों के लिए 1000 करोड़ रूपये दिये गये। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के 100 प्रतिशत घरों में बिजली पहुंच गयी है जिनमें सीमांत क्षेत्र के गांव भी शामिल हैं। रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री विकास पैकेज के तहत जम्मू कश्मीर में 54 प्रतिशत काम शुरू हो चुका है जिसके तहत 20 परियोजनाएं चालू हैं तथा आठ परियोजनाओं को वर्तमान वित्त वर्ष तक पूरा कर लिया जाएगा।

इससे पूर्व विधेयक पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की। उन्होंने जम्मू कश्मीर कैडर को अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्रशासित प्रदेशों के कैडर में विलय करने की जरूरत पर सवाल उठाया। आजाद ने कहा कि सरकार ने जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की बात की थी लेकिन इस विधेयक से ऐसी आशंका बन रही है कि वह जम्मू कश्मीर को स्थायी रूप से केंद्रशासित बनाए रखना चाहती है। अगर जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा देना ही है तो कैडरों के विलय की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में उद्योगों की संख्या में करीब 60 प्रतिशत की कमी आयी है। वहां पहले ही उद्योगों की संख्या कम थी और बाद में उनमें से भी बड़ी संख्या में उद्योग बंद हो गए, जिससे रोजगार पर असर पड़ा। आजाद ने कहा कि जम्मू कश्मीर में विकास होने का दावा वास्तविक नहीं है और जमीन पर विकास नहीं दिखता। उन्होंने कहा कि सड़कें बदहाल हैं और जलापूर्ति एवं बिजली की स्थिति भी अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर वहां निर्वाचित सरकार होती तो कुछ समाधान निकल सकता था। उन्होंने हाल ही में स्थानीय चुनाव कराए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि विधानसभा के भी चुनाव कराए जाने चाहिए क्योंकि विधायक कानून निर्माता भी हैं।

बीजेपी सदस्य दुष्यंत गौतम ने कहा 'अनुच्छेद 370 के कारण आजादी के 70 साल बाद भी वहां विभिन्न लोगों की मौलिक जरूरतें पूरी नहीं हुई। ऐसा लगता है कि उस अनुच्छेद से कहीं न कहीं लोगों का शोषण हो रहा था। लेकिन उसके हटने के बाद लोगों की मौलिक जरूरतें पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विगत में जम्मू कश्मीर में राष्ट्रविरोधी ताकतें मौजूद थीं और उस दौरान सुरक्षाबलों पर पथराव जैसी घटनाएं भी होती रहती थीं। एआईएडीएमके के नवनीत कृष्णन ने विधेयक के प्रावधानों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जम्मू कश्मीर में अधिकारियों की कमी दूर हो सकेगी।