गृह मंत्री अमित शाह ने अपने मणिपुर दौरे पर कहा कि हथियार उठाने वालों ने सरेंडर कर दिया है और अब बचे हुए भी मुख्यधारा में आएंगे। शाह पूर्वोत्तर के प्रमुख राज्य असम के दौरे पर हैं. रविवार सुबह शाह असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर पहुंचे। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा भी उनके साथ मौजूद थे। इसके बाद वो गुवाहाटी से मणिपुर की राजधानी इम्फाल पहुंचे और कई योजनाओं का शिलान्यास किया। मणिपुर में शाह के सिविल सोसाइटी के लोगों से भी मुलाकात कर रहे हैं।

अपने संबोधन में शाह ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट को हर साल 89168 करोड़ रुपये दिए जाते थे। लेकिन हमने इसे बढ़ाकर सालाना 313375 करोड़ रुपये कर दिया है।  शाह ने कहा कि आने वाले दिनों में राज्य में और भी विकास होना है। मणिपुर में सेंट्रल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और फॉरेंसिक कॉलेज बनेंगे। मणिपुर में 1186 स्टार्टअप्स शुरू हुए हैं, जो एक बड़ी कामयाबी है।

अमित शाह ने इम्फाल में कहा कि मुझे पता है कि आप थके हुए हैं और आईएलपी की मांग को भूल गए हैं और फिर 2019 में हमने इसे राज्य को जारी किया है। इससे लोगों को सुरक्षा मिलेगी और पीएम ने उसी के लिए रास्ता निकाला है।

उन्होंने कहा कि इस इलाके में में पहले बाढ़ आती थी लेकिन अब विकास की बाढ़ है। नॉर्थईस्ट अलगाववाद और हिंसा के लिए जाना जाता था। लेकिन पिछले 6 साल में सभी आतंकी संगठन एक के बाद एक हथियार डाल चुके हैं और हिंसा में कमी आई है। मुझे उम्मीद है कि बाकी के संगठन भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होंगे।

शाह ने कहा कि पहले मणिपुर की कानून-व्यवस्था की चर्चा होती थी। लेकिन बीजेपी सरकार बनने के बाद मणिपुर बंद नहीं हुआ है। अब मणिपुर विकास के पथ पर है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी संगठन ने देश के गृह मंत्री के आगमन पर किसी प्रकार के बाइकॉट या विद्रोह प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया है।