क्रिकेट में एक बार फिर नस्लवाद का मुद्दा गरमाया हुआ है। लॉर्ड्स टेस्ट में ड्रीम डेब्यू के बावजूद ओली रॉबिन्सन पर इंग्लिश एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने प्रतिबंध लगा दिया। आरोप है कि रॉबिन्सन ने आठ साल पहले रंगभेदी ट्वीट किए थे, जिसमें महिलाओं पर अभद्र टिप्णियां भी शामिल थी। इसके बाद अब दूसरे क्रिकेटर्स के भी इसी तरह पुराने ट्वीट सामने आ रहे हैं

पूरे मामले पर 1983 विश्व विजेता भारतीय टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज फारुख इंजीनियर ने अपना पक्ष रखा है। इंजीनियर की माने तो ईसीबी ने बिलकुल सही किया।  अपने पुराने अनुभव शेयर करते हुए इंजीनियर ने खुद को भी नस्लवाद का शिकार बताया। 83 वर्षीय दिग्गज ने खुलासा किया कि किस तरह उन्हें भी इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट के दौरान अभद्र टिप्णियों का सामना करना पड़ा।

60 के शुरुआती दशकों में फारुख जब पहली बार लैंकशायर की ओर से काउंटी क्रिकेट खेलने गए तब वहां उन्हें अलग नजरों से देखा जाता था। भारतीय होने पर अपमानित महसूस कराया जाता था। इंग्लैंड में बस चुके इंजीनियर की माने तो एक समय में अंग्रेज भारतीयों को गाली देते थे। इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट ओपनर ज्योफ्री बायकॉट खुलेआम भारतीयों को ब्लडी इंडियन कहते थे।

इंजीनियर ने कहा कि जब से IPL शुरू हुआ है अंग्रेजों का भारतीयों के लिए व्यव्हार अच्छा हो गया, उन्हें भारत से प्यार हो गया। अपने बेबाक बयानों के लिए पहचाने जाने वाले वयोवृद्ध पूर्व क्रिकेटर यह कहने से भी नहीं चूके कि अंग्रेज अब पैसों को लिए हमारे जूते चाटते हैं। भारत के पूर्व स्टार ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री की आलोचना की। पूरे विवाद में उनके कूदने को निंदनीय बताया।