सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र से कोविड-19 बीमा योजना विवाद (Covid-19 insurance scheme dispute) का निपटारा करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि निजी क्लीनिकों, स्वास्थ्य केंद्रों और गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कोविड-19 से लड़ते हुए अपनी जान गंवा चुके डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को 50 लाख (50 lakh insurance scheme) रुपये वाली बीमा योजना में शामिल नहीं करने से संबंधित विवाद का निपटारा किया जाए.

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) और जस्टिस ए एस बोपन्ना (Justice AS Bopanna) की पीठ ने कहा, आपको इसे सुलझाना चाहिए. आपको बीमा कंपनियों के साथ बात करनी चाहिए क्योंकि आर्थिक पहलू भी शामिल है.स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारियों से भी बात करनी चाहिए और समाधान खोजना चाहिए. केंद्र की नीति का उद्देश्य अंतत: जनता का कल्याण करना है और यह चुनिंदा तरीके से नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Solicitor General Tushar Mehta) से कहा कि यह ऐसा मुद्दा है, जो अनेक स्वास्थ्य कर्मियों से जुड़ा है और इसका तेजी से निपटारा होना चाहिए. पीठ ने कहा कि पहले एक महिला थी जिनके पति, जो डॉक्टर थे, उनकी अपने क्लीनिक में रोगियों का इलाज करते हुए कोविड से मृत्यु हो गयी. बाद में स्वास्थ्य कर्मियों के अनेक संगठन अदालत में आये और उन्होंने योजना में शामिल नहीं किये जाने के खिलाफ याचिकाएं दाखिल कीं. आपको इसे देखना चाहिए. हम इस मामले में तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेंगे.

वही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह मामले को देखेंगे और इसे सुलझाने का प्रयास करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 19 अक्टूबर को याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था और उससे स्पष्ट करने को कहा था कि महामारी से जान गंवाने वाले निजी स्वास्थ्य कर्मियों के परिवारों को सहायता देने के लिए उन्हें बीमा योजना में शामिल क्यों नहीं किया गया.