बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान ने तैमूर विवाद पर अपनी खामोशी तोड़ी है। अपने बेटे के नामकरण को लेकर मचे बवाल पर सैफ अली खान ने दो महीने बाद अपनी जुबान खोली है लेकिन उन्होंने जो सफाई दी है वही विवादित है।

गौरतलब है कि सैफ ने अपने बेटे का नाम तैमूर रखा था,जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था। लोगों ने इसे आक्रांता तैमूर अली खान से उनकी मुहब्बत माना और उन्हें देशद्रोही घोषित कर दिया। यही नहीं जिस बच्चे ने दुनिया में अभी कदम रखा ही था उसे आतंकी,जेहादी और पता नहीं क्या क्या बोला गया। सैफ अली खान ने कहा,मैं जब बड़ा हो रहा था तब तैमूर नाम के कुछ लोगों को जानता था और उनके नाम से
किसी को कोई दिक्कत नहीं थी। इस नाम का मतलब लोहा होता है और मुझे लगता है कि ये मजबूत और सुनने में अच्छा लगने वाला नाम है।

हां, मुझे पता है इस नाम का एक तुर्की शासक हुआ है लेकिन उसका नाम तिमुर था और ये तैमूर है। एक ही जगह से होने की वजह से शायद ये एक जैसा लगता हो। वैसे भी जो गुजर चुका उसकी बिना पर आज को जज करना सही नहीं है। नामा का कोई मतलब नहीं होता। अगर होता तो फिर अशोक भी हिंसक नाम है,सिकंदर भी। मैं जानता हूं कि आजकल पुरी दुनिया में इस्लामोफोबिया चल रहा है। मैं अपने बेटे का नाम सिकंदर नहीं रख सकता था और उसे राम भी नहीं बुला सकता था। तो एक अच्छा मुस्लिम नाम क्यों नहीं?

क्यों ने बच्चे की सेक्यूलर मूल्यों के साथ परवरिश की जाए? जहां सबमें एक दूसरे के लिए प्यार और इज्जत हो। तैमूर का सबसे काबिल जनरल उसका बेटा था और उसका नाम शाहरुख था। मैं जानता हूं तैमूर एक तुर्की शासक था जो शायद थोड़ा सा हिंसक था लेकिन फिर यही तो बात है। अगर आपको राज करना है तो थोड़ा सा हिंसक तो बनना ही पड़ेगा। सैफ की यही बात गैर जिम्मेदाराना है। सैफ अली खान अपने बेटे का नाम जो चाहें रखें लेकिन वह शासक वर्ग की हिंसा को जायज कैसे ठहरा सकते हैं। सैफ एक कलाकार हैं,लाखो लोग उनके फैंस हैं। उन्हें अपना आइकॉन मानते हैं। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वो अहिंसा की,प्रेम की वकालत करें।