ऐक्टर: कार्तिक आर्यन,अलाया फर्नीचरवाला

डायरेक्टर : शशांक घोष

श्रेणी: Hindi, Thriller, Mystery, Drama

कार्तिक आर्यन और अलाया फर्नीचरवाला की नई मूवी फ्रेडी आ चुकी है। इस फिल्म में इन दोनों की प्रेम कहानी कम और दुश्मनी की कहानी ज्यादा है। यह एक ऐसी फिल्म है जहां पहली बार कार्तिक आर्यन का जुनून, पागलपन और थोड़ा सिरफिरा अंदाज देखने को मिला है। डायरेक्टर शशांक घोष के निर्देशन में बनी 'फ्रेडी' में कार्तिक आर्यन की मेहनत सीन दर सीन दिखती है तो वहीं अलाया इस फिल्म का मजबूत पक्ष बनकर उभरती हैं। आइए बताते हैं 'फ्रेडी' का रिव्यू।

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ऐसी है फ्रेडी की कहानी

कमबख्त इश्क चीज है ही ऐसी की यही इश्क दांतों के डॉक्टर फ्रेडी जिमवाला (कार्तिक आर्यन) को क्या से क्या बना देता है। अकेलेपन से जूझ रहे 'फ्रेडी' की जिंदगी वैसे तो काफी सक्सेसफुल है लेकिन पर्सनल लाइफ में काफी उतार चढ़ाव हैं। आंखों के सामने बचपन में उसकी मां का कत्ल हो गया था जिसने उसके मन और दिमाग पर गहरा असर छोड़ा था। पिछले 5 सालों से वह शादी.कॉम पर अपनी सोलमेट को ढूंढने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। कुछ लड़कियां उसके भोलेपन को भोंदू समझती हैं तो कुछ पागल समझकर रिजेक्ट कर देती हैं। जैसे तैसे उसकी जिंदगी अकेले कट ही रही थी लेकिन सालों बाद एक बार फिर उसकी जिंदगी में भूचाल आता है।

फ्रेडी को उसके सपनों की रानी कायनाज (अलाया फर्नीचरवाला) मिलती है। कायनाज पहले से शादीशुदा है। उसका पति बिजनेसमैन है। मगर कायनाज अपने पति के जुल्मों से परेशान है। एक शादी में कायनाज और फ्रेडी का आमना-सामना होता है। पहली ही नजर में फ्रेडी कायनाज का हो बैठता है। फिर दोनों के दिल धीरे धीरे मिलते हैं। एक दिन दोनों तय करते हैं कि रुस्तम को रास्ते से हटाएंगे । दोनों प्लान बनाते हैं और कायनाज के पति को रास्ते से नहीं बल्कि दुनिया से हटा देते हैं।

ये तो थी मोटी—मोटी कहानी, लेकिन पर असली कहानी और ट्विस्ट यहीं से शुरू होते हैं। फ्रेडी और कायनाज क्या एक होते हैं या फिर कोई और ही साजिश है? आखिर ऐसा क्या होता है कि मासूम सा दिखने वाला फ्रेडी साइको किलर बन जाता है। इसी ट्विस्ट और मिस्ट्री को देखने के लिए आपको इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देखना होगा।

'फ्रेडी' मूवी पूरी तरह कार्तिक और अलाया के जिम्मे है। दोनों ही हीरो हैं तो दोनों ही विलेन। पहले बात करते हैं अलाया के अभिनय की जिन्होंने इस बार अपनी डेब्यू फिल्म 'जवानी जानेमन' से बेहतर परफॉर्म किया है। अच्छी बात उनके अभिनय की ये थी कि उन्होंने ओवरएक्टिंग नहीं की। कहानी जैसे जैसे मोल्ड होती है वह भी उसी तरह ढलती जाती हैं। स्क्रीन पर ज्यादातर कार्तिक को हंसाने वाले तो कभी रोमांटिक अंदाज में देखा है। पहला मौका है जब वह सनकी किरदार में दिखे हैं। मासूम फ्रेडी के रोल में कार्तिक आर्यन ने अभिनय के मामले कोई कसर नहीं छोड़ी है। उनका बढ़ा हुआ वजन और हाव-भाव सबकुछ किरदार के लिए ठीक लगते हैं। फ्रेडी भले ही कैसी भी हो लेकिन कार्तिक और अलाया ने अपने अभिनय से इंप्रेस ही किया है। हां.. जरूरी बात ये कि पूरी फिल्म देखने के बाद यकीनन आप इस बात से सहमत होंगे कि अलाया ने कार्तिक को जबरदस्त टक्कर दी है। वह मजबूत पक्ष बनकर उभरी हैं।

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ऐसा है डायरेक्शन, लेखन और टेक्नीकल पार्ट

फ्रेडी के डायरेक्शन का जिम्मा शशांक घोष के कंधों पर है तो स्क्रीनप्ले परवेज शेख व संवाद असीम अरोड़ा के। किसी भी सिनेमा में लेखक-डायरेक्टर पर्दे के पीछे के असली हीरो होते हैं। लेखन जितना बेहतर होगा तो डायरेक्शन भी उतना ही पर्दे पर निखरकर आएगा। 'फ्रेडी' में यही खूबी है जो इसे धार देता है। बस एक कमी सस्पेंस की दिखती है। सभी टर्न और ट्विस्ट का अंदाजा एक दर्शक आसानी से शुरुआत में लगा लेता है। पर कलाकारों की एक्टिंग और चंदन अरोड़ा की एडिटिंग ऐसी है जो इन कमियों पर पर्दा डालने का काम करती है। सिनेमेटोग्राफी का काम अयानंका बोस ने संभाला है जो कहानी को सुर देने का काम करते हैं। वहीं संगीत के मामले में एक बार फिर प्रीतम आपके दिल में उतर जाते हैं।