हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को एकदंत संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस तिथि का बहुत अधिक महत्व होता है। यह तिथि गणेश जी को समर्पित होती है। भगवान गणेश जी को हर काम में सबसे पहले याद किया जाता है। इस पावन दिन गणेश भगवान की विधि-विधान से पूजा की जाती है। गणेश भगवान की पूजा करने से सभी तरह के विघ्न दूर हो जाते हैं, इसलिए इनको विघ्नहर्ता भी कहते हैं।


इस दिन गणेश जी की पूजा करने से भगवान गणेश का आर्शीवाद प्राप्त होता है। भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्टों और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन व्रत रखने से जीवन आनंद से भर जाता है। संकष्टी चतुर्थी का व्रत संतान प्राप्ति के लिए भी किया जाता है। किसी तरह की कोई कमी नहीं आती है और जीवन बहुत ही सुखदायक व्यतीत होता है।

एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। कोरोना महामारी चल रही है तो घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर, व्रत भी रखें। गणपित भगवान का गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान गणेश को पुष्प अर्पित करे, दूर्वा घास चढ़ाने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं। भगवान गणेश जी को मोदक या लड्डूओं का भोग भी लगा सकते हैं।