आज मंगलवार है और सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत भी है। जैसे कि हम जानते हैं कि सावन का सोमवार जहां भगवान शंकर को समर्पित होता है, वहीं सावन मास का मंगलवार मां मंगला गौरी को समर्पित होता है। इस दिन माता पार्वती की माता मंगला गौरी स्वरूप के लिए व्रत रखा जाता है। माता गौरी की कृपा से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


मंगला गौरी व्रत का विधान
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मां मंगला गौरी अखंड सौभाग्य, सुखी और मंगल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देती हैं। मान्यता है कि संतान और सौभाग्य की प्राप्ति की कामना के लिए मां मंगला गौरी का व्रत रखा जाता है। इस व्रत में एक बार भोजन कर माता पार्वती की अराधना की जाती है। ये व्रत सुहागिनों के लिए विशेष होता है।


पूजा विधि-
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठें।
निवृत्त होकर साफ-सुधरे वस्त्र धारण करें।
इस दिन एक ही बार अन्न ग्रहण करके पूरे दिन माता पार्वती की अराधना करनी चाहिए।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां मंगला यानी माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
अब विधि-विधान से माता पार्वती की पूजा करें।

इन मुहूर्त में ना करें पूजा-

राहुकाल- दोपहर 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक।
यमगंड- सुबह 09 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक।
गुलिक काल- दोपहर 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक।
दुर्मुहूर्त काल- सुबह 08 बजकर 25 मिनट से 09 बजकर 19 मिनट तक रहेगा इसके बाद मध्य
रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से 12 बजकर 06 मिनट तक।
भद्राकाल- सुबह 05 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 59 मिनट तक।