आज जानकी नवमी हैं। वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी या जानकी नवमी कहते हैं। इसी दिन मां सीता का जन्म हुआ था। महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से बालिका का प्रकट हुई जो की सीता माता थी। जानकारी के लिए बता दें कि हल के नोक को सीता कहते हैं।


यही कारण है कि माता को सीता नाम से जाना जाता है। जैसे की हम जानते हैं कि माता सीता अपने त्याग और समर्पण के लिए पूजनीय हैं। माता सीता को याद करने के लिए और उनका आशीर्वाद पाने के लिए इस मंत्र का जाप करें।

श्री सीतायै नमः का जाप।

बता दें कि माता सीता को मां लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। माता सीता को पीले फूल, कपड़े और शृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। आज के दिन या जानकी नवमी के दिन घर के मंदिर में सभी देवी-देवताओं को गंगाजल से स्नान कराएं। माता सीता को दूध और गुड़ से बने प्रसाद अर्पित करें और व्रत रखें। शाम को पूजा कर इसी प्रसाद को ग्रहण कर अपना व्रत खोलें। इस व्रत को विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घ आयु के लिए करती हैं।