आज गीता जयंती (Geeta Jayanti) का खास पर्व हैं। आज ही के दिन मोक्षा एकादशी (mokshada Ekadashi) भी है। ज्योतिष के मुताबिक मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, एकादशी मोक्ष है। इसे मोक्षदा एकादशी का भी कहा जाता है और इस वर्ष यह 14 दिसंबर को होगी। इस दिन श्रीभगवदगीता (Shrimad Bhagavad Gita) के पठन-पाठन करना बहुत उत्तम माना जाता है।
जैसे कि हम जानते हैं कि गीता भगवान श्रीकृष्ण (Lord Shri Krishna) के श्रीमुख से अवतरित हुई हैं। श्रीमदभगवद गीता का प्राकट्य धर्म क्षेत्र कुरुक्षेत्र में मार्गशीष मास की एकादशी तिथि को हुआ और यह तिथि मोक्षदा एकादशी के नाम से प्रचलित है। गीता का एक श्लोक हमारे जीवन में बहुत अधिक मूल्यवान है।
’कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।  
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि॥’
इसका मतलब होता है कि तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल हेतु कर्म मत कर और ना ही ऐसा सोच कि फल की आशा के बिना कर्म क्यों करुं। कहने का अर्थ है कि व्यक्ति को कर्म जरुर करना चाहिए। सकारात्मक भाव के साथ कर्म करने से उचित राह मिलती है और फल भी स्वत: मिल जाता है। इसलिए पहले कर्म, फल की इच्छा नहीं।
गीता जयंती (Geeta Jayanti) व्रत विधि-

गीता जयंती के दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रखा जाता है।
गीता जयंती के दिन ब्रह्म बेला में उठकर भगवान विष्णु का ध्यान एवं स्मरण कर दिन की शुरुआत करें।
इसके बाद स्नादि के समय गंगाजल से स्नान करें और ऊं गंगे मंत्र का उच्चारण करें।
साथ ही भगवान श्रीहरि की पूजा, पुष्प, धूप, दीप एवं दुर्वा अर्पित करें।
अंत में पूजा अर्चना कर आरती करें।
इस दिन पूरे दिन उपवास रखा जाता है।
इच्छा हो तो एक बार जल एवं फल ग्रहण कर सकते हैं।
संध्याकाल में फलाहार करें।