आज बैकुंठ चतुर्दशी (Vaikuntha Chaturdashi) का पर्व हैं। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु (Lord Vishnu) जब चार माह की निद्रा अवस्था से बाहर आते हैं नींद से उठकर वह तुरंत बाद भगवान शिव (Lord Shiva) की पूजा करते हैं। बताया जाता है कि  जब विष्णु जब सोने जाते हैं तो सृष्टि का पालन महादेव करते हैं।
 
बता दें कि आज के दिन भगवान विष्णु की 1000 कमल से पूजा करने पर बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है तो चलिए जानते हैं बैकुंठ चतुर्दशी (Vaikuntha Chaturdashi) की पूजा विधि।
 
1. बैकुंठ चतुर्दशी (Vaikuntha Chaturdashi)के दिन साधक को सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।

2. इसके बाद एक साफ चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़कर कर पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

3. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा 1000 कमल से की जाती है। लेकिन आप भगवान विष्णु को एक हजार कमल नहीं चढ़ा सकते तो आप उन्हें एक ही कमल चढ़ा दें।

4.भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की प्रतिमा स्थापित करने के बाद उनका चंदन से तिलक करें,उन्हें कमल का फूल चढ़ाएं, तुलसीदल चढ़ाएं,ऋतुफल चढ़ाएं।

5.इसके बाद धूप व दीप जलाकर उनकी विधिवत पूजा करें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। श्री सूक्त का पाठ करें और बैकुंठ चतुर्दशी की कथा पढ़ें या सुनें।

6.कथा सुनने के बाद भगवान विष्णु की धूप व दीप से आरती उतारें।

7.इसके बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को खिचड़ी, घी और आम के आचार प्रसाद का भोग लगाएं और स्वंय भी परिवार के साथ इस प्रसाद को ग्रहण करें।

8. अंत में भगवान विष्णु से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करना न भूलें।

9.इसके बाद शाम के समय किसी नदी या सरोवर के पास 14 दीपक अवश्य जलाएं।

10.अगर आपके घर के आस-पास कोई नदी या सरोवर नहीं है तो आप जहां पर पानी रखते हैं उस स्थान पर इन दीपक को जला सकते हैं।