दुनिया में कई तरह के पत्थर हैं, जिसकी अलग अलग खासियत है। इनकी खासियत ही इनको अलग बनाती है। पत्थरों मे डायमंड और कोहीनूर भी आता है इसी तरह से हीरा, पन्ना, जवाहरात, पुखराज की अपनी एक खासियत है और इस तरह से नीलम भी है जो कि शनिदेवका रत्न कहा जाता है। नीलम (Neelam) के बारे में बताया गया है कि इसे कुंडली, राशि और सही समय पर ही धारण करना चाहिए।



बता दें कि इसे गलत समय पर धारण करने से लाभ की जगह हानि होती है। नीलम रत्न धारण करने में यह ध्यान रखा जाना अत्यंत आवश्यक है कि वह रत्न पूरी तरह शुद्ध हो। नीलम की अशुद्धियों के कारण भी वह विपरीत प्रभाव देता है। नीलम (Neelam) के नौ प्रकार के दोष बताए गए हैं। जैसे......


नीमल (Neelam) के दोष-
    अभ्रक दोष: जब नीलम में अभ्रक का मिश्रण होता है तो उसकी आभा भी अभ्रक की तरह हो जाती है। अभ्रक दोषयुक्त नीलम धारण करने से धन की हानि होती है।
    कड़कड़ाहट दोष : कड़कड़ाहट या कर्कराहट दोष युक्त नीलम में अनेक प्रकार की आड़ी-तिरछी रेखाएं होती है। ऐसे दोष युक्त नीलम धारण करने से जातक अनेक प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाता है।    कठोर: जो नीलम कठोर, खुरदुरा होता है वह विपरीत प्रभाव देता है। ऐसा नीलम पहनना स्वयं अपने धन का नाश करना होता है।    मलिन: यदि नीलम मलिन, मटमैला हो तो ऐसा नीलम मित्रों, स्वजनों से दूर करवा देता है। जो व्यक्ति ऐसा दोषयुक्त नीलम पहनता है वह अकेला रह जाता है,डर बना रहता है।    मटीला: मिट्टी जैसे रंग वाला, कांतिहीन नीलम पहनना हानिकर होता है। यह अनेक प्रकार के कष्ट मनुष्य को देता है।
    विवर्ण: विवर्ण अर्थात अनेक वर्णो रंगों वाला। रंग-बिरंगा नीलम पहनने से हिंसक और जहरीले पशुओं का भय बना रहता है।


(यह आलेख सिर्फ जनरुचि के लिए हैं, यह आलेख इन सब का दावा नहीं करता है। यह लौकिक मान्यता आधारित है।)