होली का त्योहार हर्ष उल्लास का त्योहार है। इस दिन रंगों से खेलकर होली के त्योहार का आनंद लिया जाता है। नाच गाना ढोल नंगाड़े सभी की ताल ठोकी जाती है। इस दिन भांग का सेवन खासतौर से किया जाता है। लोग भांग का नशा कर होली खेलते हैं और नाच गाना करते हैं। भांग का सेवन इस दिन लोग अलग-अलग तरीकों से करते हैं। इसमें भांग की लस्सी, भांग के पकोड़े, भांग की ठंडाई और भांग की गुजिया आदि शामिल है।

भांग


ऐसा माना जाता है कि समुद्र मंथन के दौरान जो विष निकला था वो शिव ने गले के नीचे नहीं उतरने दिया। ये विष बहुत गर्म था। इस कारण शिव को गर्मी लगने लगी। शिव कैलाश पर्वत चले गए। विष की गर्मी को कम करने के लिए शिव ने भांग का सेवन किया। भांग को ठंडा माना जाता है। इसके बाद से भगवान शिव को भांग बहुत पसंद हैं।


यह भी पढ़ें- रूस-यूक्रेन युद्ध से आम आदमी की जेब होगी ढीली, हाई स्टेज पर पहुंची महंगाई


भगवान शिव की पूजा के दौरान भांग का इस्तेमाल भी किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भांग के बिना शिव की पूजा अधूरी है। कहा जाता है कि शिव पूजा में भांग अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। भांग के साथ धतूरा और बेलपत्र भी अर्पित किया जाता है।

यह भी पढ़ें- दुनिया के सबसे अमीर एलन मस्क ने पुतिन को दिया ओपन चैलेंज, घबराए रूसी राष्ट्रपति


होली पर भांग के सेवन का कारण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली के दिन भगवान शिव और विष्णु की दोस्ती के प्रतीक के तौर पर भांग का सेवन करते हैं। दरअसल ऐसा माना जाता है कि भक्त प्रहलाद को मारने की कोशिश करने वाले हिरण्यकश्यप का संहार करने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह का रूप लिया जाता है लेकिन हिरण्यकश्यप का संहार करने के बाद वे क्रोधित थे।

उन्हें शांत करने के लिए भगवान शिव ने शरभ अवतार लिया था। इसे भी एक कारण माना जाता है कि होली के दिन भांग का सेवन किया जाता है। प्रसाद के रूप में इसका सेवन किया जाता है। इसके अलावा कई अन्य कथाएं भी प्रचलित हैं।