काला जादू (black magic) एक तरह की विद्या है जो आज के हाई टेक के समय में भी बहुत ज्यादा काम में ली जाती है। यह विद्या किसी को बर्बाद करने और किसी का जीवन सवारने के काम आती है। दुनिया में सबसे ज्यादा काला जादू अफ्रीका (Africa) और भारत (India)देश में किया जाता है। भारत देश में दो जगहें काले जादू (black magic) के प्रसिद्ध है सबसे पहले बंगाल (Bengal) और दूसरा असम (Assam)।

बता दें कि अफ्रीका का काला जादू वूडू नाम से जाना जाता है। इसकी मुख्य विशेषता है इसमें इस्तेमाल होने वाले जानवरों के शरीर के हिस्से व पुतले होते हैं। लोगों के लिए आज भी ये विद्या एक रहस्य है। आपको जानकर काले जादू (black magic) के रहस्य जानकर हैरान होगी। आइए जानते हैं इस काल का काला राज-

 

बताया जाता है कि ब्लैक मैजिक (black magic) सीखने के लिए व्यक्ति को विशेष प्रार्थना और पूजा पाठ करनी पड़ती है। कड़ी तपस्या के बाद ही यह सिद्धि प्राप्त होती है। इस विधा को कई लोग अन्धविश्वास मानते हैं मगर काला जादू सच है। यह तंत्र विद्या से जुड़ा है।

गुड़िया में जान डालना

काले जादू (black magic) में यह एक बहुत ही दुर्लभ प्रक्रिया है जिसे बहुत ही विशेष परिस्थितियों में अंजाम दिया जाता है। इसे करने के लिए उच्च स्तर की विशेषज्ञता की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में गुड़िया जैसी मूर्ति का इस्तेमाल होता है। यह गुड़िया कई तरह की खाने की चीजों जैसे बेसन, उड़द के आटे आदि से बनाया जाती है। इसमें विशेष मंत्रों से जान डालकर, जिस व्यक्ति पर जादू करना होता है उसका नाम लेकर पुतले को जागृत किया जाता है।

काला जादू यानि वूडू (voodoo)

ऐसा माना जाता है कि 1847 में एरजूली डेंटर नाम की वूडू देवी एक पेड़ पर अवतरित हुई थी। उसे सुंदरता और प्यार की देवी माना जाता था। यहां उसने कई लोगों की बीमारियां और परेशानियां अपने जादू से दूर कर दी। एक कैथोलिक पादरी को यह सब पंसद नहीं आया, उसने इसे ईशनिंदा करार देकर उस पेड़ के तने को काट डालने का आदेश दिया। इसके बाद में स्थानीय लोगों ने यहां देवी की मूर्ति बनाई और पूजा करने लगे।
जानवरों के अंगों से काला जादू

अफ्रिका में वूडू (voodoo) में मुख्य तौर पर जानवरों के अंगो का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जानवरों के अंगों से समस्या समाधान का दावा किया जाता है। इस जादू से पूर्वजों की आत्मा किसी शरीर में बुलाकर भी अपना काम करवा सकते हैं। इसके अलावा दूर बैठे इंसान के रोग व परेशानी के इलाज के लिए पुतले का भी उपयोग किया जाता है। वूडू जानने वालों का मानना है कि इस धरती पर मौजूद हर जीव शक्ति से परिपूर्ण है। इसलिए उनकी ऊर्जा का उपयोग करके बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। वूडू (voodoo) में जानवरो जैसे की बंदर, मगरमच्छ, बकरी, ऊंट, लंगूर, छिपकली, तेंदुए आदि के अंग उपयोग में लाए जाते हैं।