शनिदेव बहुत ही ज्यादा क्रूर माने जाते हैं। गलत करने की सजा खौफनाक देते हैं और अच्छा करने का फल देते हैं। इसी तरह से शनिदेव की ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक शनि की महादशा के तीन चरण होते हैं। पहले चरण में शनि की साढ़े साती और शनि ढैय्या से पीड़ित राशि वालों को शारीरिक, मानसिक कष्टों और दूसरे चरण में आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। तीसरे चरण में शनि बाकी दोनों चरणों के नुकसान की भरपाई करते हैं।


शनि की साढ़ेसाती
जब शनि राशि परिवर्तन करते हैं तब तीन राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और दो राशियों पर शनि की ढैय्या लग जाती है। शनि जिस राशि में राशि परिवर्तन करते हैं उस पर और उससे एक राशि आगे और एक राशि पीछे पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो जाती है।

शनि की ढैय्या
शनि ढाई साल में एक बार राशि परिवर्तन करते हैं। शनि के राशि परिवर्तन के समय शनि जिस राशि से चौथे या आठवें भाव में होते हैं, तब उस राशि पर शनि की ढैय्या शुरू हो जाती है।